प्रदीप मिश्रा के कार्यकम स्थगित होने पर मचा बवाल, अब हुआ ये बड़ा खुलासा

भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज के गृह जिले सीहोर में कथा वाचक प्रदीप मिश्रा के साथ घटा घटनाक्रम सरकार के लिए मुसीबत बनता ही जा रहा है। सीहोर में हुई इस घटना के बाद से ही प्रदेश में ये मामला बुरी तरह से गरमाया हुआ है। इसी बीच अब इस मामलें में बड़ा खुलासा हुआ है। अब सीहोर प्रशासन की वह चिट्ठी सामने है, जिसमें बाकायदा पंडित मिश्रा को ऑफलाइन इवेंट की परमिशन दी गई है। कथा में भीड़ जुटनी ही थी, यह परमिशन के साथ ही साफ हो गया था।

लेकिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने 7 फरवरी को एसडीएम को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने एसडीएम से ऑनलाइन कार्यक्रम की अनुमति मांगी थी। पंडित प्रदीप मिश्रा की और से लिखी गई चिट्ठी में कहा गया था की – रुद्राक्ष महोत्सव ग्राम चितवालिया हेमा स्थित गौशाला परिसर में दिनांक 28 फरवरी से 6 मार्च 2022 तक होगा। कथा ऑनलाइन रहेगी, कुछ ही भक्तों की आने की संभावना है। हम कोरोना गाइडलाइन और निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करेंगे। सायंकाल धार्मिक सांस्कृति एवं राष्ट्र को समर्पित कार्यक्रमों का मंचन होगा।
पंडित मिश्रा ने ऑनलाइन कथा की परमिशन मांगी और बाद में जब कोविड पाबंदियां हटीं तो बाकायदा ऑफलाइन कथा की परमिशन दी गई। वह भी पुलिस की ऑनलाइन ही कथा कराने की सिफारिश को खारिज करते हुए प्रशासन ने भीड़ जुटाने की अनुमति दे दी। लंबा जाम लगने और उसमें मंत्रियों के फंसने के बाद आनन-फानन में प्रशासन ने पंडित प्रदीप मिश्रा से बात कर पुरानी चिट्ठी का हवाला दिया और कार्यक्रम स्थगित करा दिया।
पंडित मिश्रा के इवेंट को कथित दबाव में स्थगित कराने के पीछे मंत्रियों के जाम में फंसने का ही बड़ा कारण सामने आ रहा है। दरअसल, अब मध्यप्रदेश में कोई भी कोविड पाबंदी लागू नहीं है। सोशल डिस्टेसिंग और मास्क ऐसे प्रतिबंध हैं, जिनकी अनदेखी कर तमाम नेता, अफसर ही बड़े-बड़े धार्मिक इवेंट्स में और रैलियों में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला भी यहां सीधे जुड़ते नहीं दिख रहा है।
बता दे कि सीहोर में रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन किया गया था और इसमें लाखों श्रद्धालुओं के आने की वजह से भोपाल इंदौर हाईवे पर 25 किलोमीटर लंबा जाम लग गया था। इसके चलते प्रशासनिक व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो गई थी और अंततः कथा वाचक प्रदीप मिश्रा को अपना कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। उनका कार्यक्रम स्थगित होने के बाद से ही प्रदेश में बवाल मचा हुआ है।




