आदिवासी दिवस की छुट्टी पर बवाल : मंत्री उषा ठाकुर बोली, छुट्टी लेकर क्या करना? बल्कि खूब काम करना चाहिए

भोपाल : सोमवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन आदिवासी दिवस की छुट्टी के मुद्दे पर सियायत गरमाई रहीं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आदिवासी दिवस का अवकाश समाप्त क्यों किया गया? कांग्रेस द्वारा ये सवाल उठाए जाने के बाद भाजपा को इसका जवाब देने में ज़रा भी समय नहीं लगा।
प्रदेश की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर बोलीं ऐसे तो फिर पूरे साल 365 दिन छुट्टी कर देनी चाहिए। कोई भी दिवस हो उस दिन खूब काम होना चाहिए ना की अवकाश होने चाहिए। अवकाश के बजाए उस दिन ज्यादा काम करना चाहिए। आदिवासी जैसा मेहनतकश और मेहनत से काम करने वाला कोई दूसरे समाज नहीं है। संस्कृति मंत्री ने कहा क़ी छुट्टी लेकर क्या करना? बल्कि खूब काम करना चाहिए। अवकाश की मांग आम आदमी की नहीं है। यह मांग एक वर्ग विशेष की है जो प्रदेश की सुख शांति को भंग करना चाहता है।
इससे पहले इस मुद्दे को लेकर सदन में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बीच भी काफी तीखी नोकझोंक हुई। कार्यवाही प्रारंभ होते ही कांग्रेस दल के विधायकों ने सरकार पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए आसंदी के सामने आकर नारेबाजी की।
कमल नाथ ने कांग्रेस के विधायकों के विरोध का हवाला देकर कहा कि यह जो आक्रोश है इसका कारण आदिवासी दिवस को समाप्त करना हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस श्रद्धांजलि में राजनीति कर रही है। भाजपा आदिवासियों की सबसे हितैषी पार्टी है। हम 15 नवंबर को बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर जनजाति गौरव दिवस मनाएंगे। अवकाश भी रहेगा।
इस पर कमल नाथ ने पूछा कि फिर आदिवासी दिवस का अवकाश निरस्त क्यों किया। मुख्यमंत्री ने फिर कहा कि जनजातीय मंत्रालय भाजपा ने बनाया है। पेसा एक्ट भी शिवराज सिंह चौहान लागू करेगा, आप नहीं करोगे। इस पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों के ऊपर घटिया राजनीति कर रहे हैं। हम आदिवासियों के कल्याण के लिए सब कुछ अर्पित कर देंगे। आप लोगों (कांग्रेस) ने प्रदेश में गलत संदेश दिया है।




