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रिटायर्ड जस्टिस रमेश कुमार गर्ग ने कहा- ज्यादा समय तक स्पीकर भी फ्लोर टेस्ट को नहीं रोक सकते !

 

भोपाल: कमलनाथ सरकार अपने बागी विधायकों के बगावत में जहाँ फस्ती नजर आ रही है। दूसरी तरफ सरकार और स्पीकर उन्हें विधानसभा में उपस्थित होने के लिए मजबूर भी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि आपको बता दें कि ऐसी स्थिति का सामना करने के लिए कोई कानूनी प्रावधान ही मौजूद नहीं हैं। जुलाई 2019 में यही स्थिति कर्नाटक में भी थी। उस समय सरकार कोर्ट पहुंच गयी थी लेकिन कोर्ट ने कहा था कि मौजूदा समय में ऐसा कोई कानून ही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 7 दिन में इस्तीफे की वैधता जांचें  

मध्यप्रदेश में जिन 22 विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं, उनका फैसला स्पीकर ही लेंगे। प्रतापगौड़ा पाटिल बनाम कर्नाटक सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश था कि इस्तीफा दिए जाने के 7 दिन के अंदर स्पीकर उनकी वैधता की जांच करें और यदि वे सही हों पाए जाते हैं तो इस्तीफ़ा मंजूर करें, अन्यथा खारिज कर सकते हैं।  
     
अगर स्पीकर द्वारा इस्तीफ़ा मंजूर कर लिया जाता है तो 22 विधायकों की सदस्यता चली जाएगी और कांग्रेस सरकार में शामिल सदस्यों की संख्या 121 से घटकर 99 हो जाएगी। सदन की संख्या 206 हो जाएगी और बहुमत का आंकड़ा 104 पर आ जाएगा।

विधायकों को उपस्थित होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता

स्पीकर ने विधायकों को नोटिस देकर उपस्थित होने को कहा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि विधायकों को उपस्थिति के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे में फ्लोर टेस्ट को भी स्पीकर अधिक समय तक रोककर नहीं रख सकते।

यदि कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों के अपहरण का आरोप लगाकर कोर्ट जाती है, तो हैबियस काॅर्पस के तहत केस दर्ज होगा। विधायक कोर्ट में हाजिर होंगे तभी  केस खारिज होगा। लेकिन कोर्ट से उन्हें सदन में हाजिर कराने के लिए फिर भी बाध्य नहीं किया जा सकेगा।

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