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नई शराब निति का विरोध, 17 जिलों में ठेके लेने से पीछे हटे ठेकेदार….सरकार खुद चलवाएगी ठेके?

भोपाल : मध्यप्रदेश में नई शराब नीति के तहत 17 जिलों में सिंगल की जगह ग्रुप में दुकानों के टेंडर दिए जा रहे हैं। जिससे ठेकेदार खफा है, इसके साथ ही ठेकेदारों और सरकार के बीच तकरार जारी है। वहीं, नीति के विरोध के चलते ठेकेदार भोपाल, इंदौर, जबलपुर-ग्वालियर समेत प्रदेश के 17 जिलों में ठेके लेने से पीछे हट रहे हैं।

ठेकेदारों का कहना है कि विभाग ने इस बार 25% रिजर्व प्राइस बढ़ा दिया। यह घाटे का सौदा है। वहीं, देशी और अंग्रेजी शराब एक ही दुकानों पर बेचने की शर्त भी है। इस कारण कारोबार पर असर पड़ेगा। लिहाजा, वे ठेके लेने से पीछे हट रहे हैं। यही कारण है कि 23 मार्च तक छह दौर की नीलामी होने के बावजूद 65% ठेके नीलाम नहीं हो सके हैं।

कहा जा रहा है कि यदि ठेकेदार ठेके नहीं लेते हैं तो 1 अप्रैल से भोपाल-इंदौर समेत 17 जिलों की 65% शराब दुकानें नहीं खुलेगी। ऐसे में सरकार को करोड़ों के रेवेन्यू का नुकसान होगा। 

क्यों है ठेकेदार ख़फ़ा 

दरअसल, साल 2020-21 और 2021-22 में यह सिंगल ठेके की व्यवस्था थी। यानी एक ही ठेकेदार जिले की दुकानों का संचालन करते थे। 2022-23 के लिए 3-3 दुकानों के ग्रुप बना दिए गए हैं। यानी, ठेकेदार ग्रुप में दुकान चलाएंगे। इस नीति को लेकर ही ठेकेदार खफा है। वे दुकानें लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। 17 जिलों में एवरेज 35% ठेके ही नीलाम हो पाए हैं।

बता दे कि इन 17 जिलों में भोपाल, राजगढ़, इंदौर, खंडवा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, कटनी, रीवा, सतना, उज्जैन, नीमच, सागर, ग्वालियर, शिवपुरी, भिंड और मुरैना जिले शामिल हैं। 

इधर, रेवेन्यू के नुकसान से बचने के लिए सरकार या तो खुद ठेके चलवा सकती है या फिर नई शराब नीति में बदलाव कर ठेकेदारों को राहत दे सकती है।

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