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किसान आंदोलन पर अब सरकार को अपना ‘‘अड़ियल’’ रुख बदल लेना चाहिए

किसान आंदोलन पर अब सरकार को अपना ‘‘अड़ियल’’ रुख बदल लेना चाहिए

नई दिल्ली/राजकमल पांडे। कृषि कानूनों को लेकर पिछले 53 दिनों से किसान दिल्ली की सीमा में आंदोलन कर रहे हैं. वहीं 9 वें दौर की वार्ता तक में किसानों की समस्या का समाधान नहीं निकल पाया है. तो सुप्रीम कोर्ट मे दाखिल याचिका पर भी आए फैसले के बाद बनी समीक्षा कमेटी से किसान संतुष्ट नहीं है. सरकार और किसान के बीच रस्साकसी अभी और कुछ दिनों तक चलने वाली है. वहीं 19 जनवरी को होने वाली दसवें दौर की वार्ता से पहले कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने रविवार को किसान नेताओं से निवेदन करते हुए कहा कि वे नए कृषि कानूनों पर अपना ‘‘अड़ियल’’ रूख छोड़ दें और कानूनों की हर धारा पर चर्चा के लिए आएं.

गौरतलब है कि कृषि कानून बिल पर सरकार का ‘‘अड़ियल’’ रूख  किसानों को दिल्ली की सीमा में डटे रहने पर मजबूर किया हुए है. किसानों का कहना है कि हम संसोधन या समीक्षा से किसान आंदोलन बंद कर घर वापसी नहीं करेंगे बल्कि सरकार का कृषि कानून वापस लेना पड़ेगा तभी हम किसान आंदोलन बंद करेंगे. पर सरकार का कहना है कि अब जबकि उच्चतम न्यायालय ने इन कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी हैं. तो ऐसे में किसान का अड़ियल रूख अपनाने से कोई सवाल ही नहीं उठता है.

वहीं सरकार चाहती है कि किसान नेता 19 जनवरी को वार्ता के लिए आएं और बैठक में कानून की हर धारा पर चर्चा करें. और कानूनों को निरस् करने की मांग को छोड़कर, सरकार ‘‘गंभीरता से और खुले मन के साथ’’ अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए तैयार है. गौरतलब है कि केन्द्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसान विशेषकर हरियाणा और पंजाब के किसान दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के क्रियान्वयन पर 11 जनवरी को अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी थी. साथ ही, न्यायालय ने गतिरोध का हल निकालने के लिए चार सदस्यीय एक समिति भी नियुक्त की थी.

तोमर ने कहा कि सरकार ने कुछ रियायतों की पेशकश की थी, लेकिन किसान नेताओं ने लचीला रूख नहीं दिखाया और वे लगातार कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने दोहराया कि सरकार पूरे देश के लिए कानून बनाती है. कई किसानों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों ने कानूनों का समर्थन किया है. केन्द्र और 41 किसान यूनियनों के बीच अब तक नौ दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है.

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