एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान चीथड़ों को ढंकने में माहिर, जनता कों उल्लू बना कुर्सी पर बैठे, 21हज़ार से ज़्यादा स्कूल एक टीचर के भरोसे

एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान चीथड़ों को ढंकने में माहिर, जनता कों उल्लू बना कुर्सी पर बैठे, 21हज़ार से ज़्यादा स्कूल एक टीचर के भरोसे

 

 

एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान चीथड़ों को ढंकने में माहिर, जनता कों उल्लू बना कुर्सी पर बैठे,

 

स्वतंत्र पत्रकार सौमित्र रॉय की फेसबुक वॉल से साभार 

वे फटेहाली को एक नए कपड़े, यानी योजना से ढांक देते हैं और बीते डेढ़ दशक से ऐसे ही जनता को उल्लू बनाकर कुर्सी पर बैठे हैं। 

यूनेस्को की 2021: स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फ़ॉर इंडिया के मुताबिक एमपी में शिक्षकों के 87630 पद खाली हैं। 21 हज़ार से ज़्यादा स्कूल एक टीचर के भरोसे चल रहे हैं।

लेकिन बजाय शर्मसार होकर शिक्षक भर्ती करवाने के, मामा ने बेवकूफ़ बनाने के लिए सीएम राइज स्कूल का फ़लसफ़ा पेश किया है। 

ऐसा एक स्कूल भोपाल में भी है, जिसमें बिजली ही नहीं है और स्मार्ट क्लासरूम बन गए हैं। 

मीडिया को भी स्कूल शिक्षा विभाग से लगातार पेडिग्री मिलती है, सो वे आंख मूंदे रहते हैं। NGO वाले गले में ग़ुलामी का पट्टा डालकर बैठे हैं।

इस मूर्खतापूर्ण नीति की पैदाइश हैं मोदी और अजय मिश्रा जैसे नेता, जिनमें सरकार चलाने की कोई योग्यता नहीं, लेकिन कुर्सी पर विराजमान हैं, क्योंकि जनता भी मूर्ख है। 

शिक्षा, स्वास्थ्य इस देश में कभी भी राजनीतिक मुद्दा नहीं बन पाता, क्योंकि अवाम ने प्राइवेट में इसके विकल्प चुन लिए हैं।

कोविड के दौरान प्राइवेट अस्पतालों की लूटमार ने राइट टू हेल्थ की मांग खड़ी की जरूर थी, लेकिन कुछ ही दिन में आवाज़ घुट गई। 

अब तो शिक्षा और स्वास्थ्य, दोनों अनाथ हो चुके हैं। नो टीचर्स, नो क्लास नाम की रिपोर्ट यह भी बताती है कि 60% अंडर क्वालिफाइड टीचर्स प्राइवेट स्कूलों में उच्च माध्यमिक स्तर की क्लास ले रहे हैं। 

यानी पढ़ाने वाले और कुर्सी पर हांकने वाले दोनों मूर्ख हैं। 

तो देश में मूर्खता का राज क्यों न हो?