अब बचपन से बेटियों को "गुड्डे-गुड़िया" नहीं, "आर्मी सेट" लाकर देंगे माता-पिता  

अब बचपन से बेटियों को "गुड्डे-गुड़िया" नहीं, "आर्मी सेट" लाकर देंगे माता-पिता  

अब बचपन से बेटियों को गुड्डे-गुड़िया नहीं, आर्मी सेट लाकर देंगे माता-पिता

विशेष रिपोर्ट:गरिमा श्रीवास्तव 

आए दिन देश की बेटियों पर संकट गहराता जा रहा है, स्थिति कोई भी हो हालात कोई भी हों, बेटियों के साथ कितना भी बुरा हुआ हो पर हमारे देश भारत में बेटियों पर सवाल खड़ा करने वालों की कमी नहीं है. 

ऐसे में माता पिता जो बड़े लाड़ प्यार से खिलौनों कहानियों के बीच बेटी को परी जैसे पालते हैं वह किस तरह से अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त रहें...? 
यह सवाल बहुत बड़ा है, जवाब ढूंढ पाना बेहद मुश्किल !!
पर हाँ नामुमकिन भी नहीं... आए दिन देश में रेप हो रहे हैं. रेप करने के बाद नरभक्षी बेटियों को मौत के घाट तक उतार दे रहे हैं, अगर कुछ बेटियां बच भी गई तो चौपट व्यवस्था और समाज उन्हें जीने नहीं दे रही है.. संकट के काले बादल दिन ब दिन गहराते जा रहे हैं. 
पर अब बेटियों के माता पिता ने भी प्रण लिया है कि वह बेटी के जन्म लेते ही उसे गुड्डा गुड़िया नहीं बल्कि आर्मी सेट लाकर देंगे.. कार्टून दिखाने की जगह देशभक्तों की फिल्में दिखाएंगे.. बेटियों को यह बात सिखाएंगे कि जब कोई तुम्हारे साथ खड़े ना हो तो तुम खुद के साथ खड़ा रहना. अपनी ढाल स्वयं बनना. 


 रेप की घटना जब भी देश में घटित होती है, तो लोग अपनी अपनी बेटियों को चौक बंद करने लगते हैं. पर ऐसा करना उचित नहीं है.. बल्कि इस जगह पर बेटियों को सिखाना होगा कि ऐसे समय में मुश्किल का सामना कैसे करना है. 

 आज भी समाज में ऐसे गंदे लोग हैं जो देश में कोई भी कृत्य घट जाए उसका जिम्मेदार लड़कियों को ठहराते हैं. बलिया के एक विधायक ने भी ऐसा ही बयान दिया. उसने कहा कि जितना सरकार का धर्म है उतना ही माता-पिता का धर्म है वह अपनी बेटियों को शालीन बनायें. हालांकि उनके इस बयान के बाद जनता उन्हें जमकर लताड़ नहीं है. पर सिर्फ एक ही इंसान ऐसा नहीं है जो इस तरह के विचार रखता है. देश में ऐसे कई लोग हैं, जो किसी भी कृत्य का जिम्मेदार लड़कियों को ठहराते हैं... उनके कपड़ों को ठहराते हैं. 

 अब लड़कियों को बेलन की जगह तलवार थमाने की जरूरत है. ताकि वह अपने साथ बुरे कृत्य करने वाले को या बुरी नजर डालने वालों को तत्काल सजा दे सकें.. चौक बंद करना किसी भी रुप में सही नहीं है. यह अपराध को और बढ़ावा देगी. और लड़कियों के आत्म संबल को गिराएगी.