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इंदौर में ऑनलाइन फ्रॉड के लिए हैकर ने अपनाया नया तरीका, युवक के क्रेडिट कार्ड से 2.59 लाख का ट्रांजेक्शन

  • मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ रहे हैं ऑनलाइन फ्रॉड के मामले
  • इंदौर में नया तरीका अपनाकर किया गया ऑनलाइन फ्रॉड
  • सियागंज इलाक़े के एक युवक के क्रेडिट कार्ड से 2.59 लाख का फ्रॉड
  • मामले में पुलिस की लापरवाही भी आयी सामने

इंदौर/अंजली कुशवाह : मध्य प्रदेश में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. लेकिन इंदौर में पहली बार ऑनलाइन फ्रॉड के लिए एक हैकर ने नया तरीका अपना कर सियागंज में रहने वाले एक युवक के क्रेडिट कार्ड से 2.59 लाख फ्रॉड किया. हैकर ने रात 3 बजे मोबाइल कंपनियों को वॉइस मैसेज भेज युवक की दो सिम ब्लॉक करवा कर दो क्रेडिट कार्ड से 2.59 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन कर लिया. हैकर ने ओटीपी और सिक्योर ट्रांजेक्शन के लिए एक क्लोनिंग सिम भी यूज की, ताकि बैंक वाले ट्रांजेक्शन ना रोके. इस तरह की वारदात पहली बार हुई है.

मामले में पुलिस की लापरवाही भी आयी सामने

जानकारी के मुताबिक इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आयी हैं. पीड़ित युवक राहुल पिता मोहन चौहान ने एफआईआर दर्ज करवाने के लिए थाने के 20 बार चक्कर भी लगा दिए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. अब उसने एसपी पूर्वी क्षेत्र के कार्यालय में शिकायती आवेदन दिया है. राहुल ने बताया कि 28 अगस्त की सुबह 11 बजे उसे एक दोस्त ने घरवालों के नंबर पर फोन कर कहा कि तुम्हारी दोनों सिम बंद हैं. राहुल ने अपनी कंपनियों में फोन लगाया तो पता चला कि रात 3 बजे उसने ही वॉइस मैसेज भेजकर सिम ब्लॉक कराई थी. उसी रात उसके एक क्रेडिट कार्ड से 1,16,563 और दूसरे कार्ड से 1,43,091 रुपए का ट्रांजेक्शन हो गया .

ओटीपी देकर करवाया गया ट्रांजेक्शन

क्रेडिट कार्ड कंपनी के कस्टमर केयर अधिकारी ने राहुल को बताया कि बाकायदा ओटीपी देकर ट्रांजेक्शन करवाया गया है, यानी इस अकाउंट से अटैच मोबाइल नंबर की क्लाेन सिम बनाकर ओटीपी दिए. जिसे सिक्योर ट्रांजेक्शन कहा जाता है, यानी यह आपकी सहमति से हुआ है. अब यह पैसा किसी भी हाल में रोका नहीं जा सकता.

कंपनी ने दिया ऑफर 

राहुल ने बैंक पर भी आरोप लगते हुए बताया है कि उसने क्रेडिट कार्ड कंपनी के अधिकारियों को बताया कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है. इस पर कंपनी की ओर से से कहा गया कि आपको पैसा पूरा भरना ही होगा. इसके लिए कंपनी ने ऑफर दिया कि जितने रुपयों की धोखाधड़ी हुई है, उतने का लोन कंपनी से ले लें, फिर उसे किस्तों में भर देना.

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