"अंधेरे में डूबेगा प्रदेश"! 12 सूत्रीय मांगों को लेकर अड़े बिजली आउटसोर्स कर्मचारी, अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी

भोपाल/खाईद जौहर : मध्यप्रदेश में अब शिवराज सरकार के खिलाफ बिजली कंपनी के आउटसोर्स कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। बता दे कि बिजली कंपनियों में संविलियन, वेतन-भत्ता समेत 12 सूत्रीय मांगों को लेकर पांचों कंपनी के करीब 45 हजार कर्मचारी सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए है। जिसके चलते बिजली संबंधित कामों पर असर पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि अगर ये अनिश्चितकालीन हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो बिजली का मेंटेनेंस, राजस्व वसूली, मीटर रीडिंग, बिल वितरण, उपभोक्ता कंप्लेंट, नए कनेक्शन, लाइनों का मेंटेनेंस, फाल्ट फिटरो के साथ सुधार के काम भी प्रभावित हो सकता है।
इन मांगों को लेकर आउटसोर्स कर्मचारियों ने की निश्चितकालीन हड़ताल
- आउटसोर्स कर्मचारियों को प्रतिमाह वेतन पर्ची, इंश्योरेंस व ईएसआईसी कार्ड की प्रति, ऑफर लैटर, आईडी कार्ड दिए जाए।
- सब स्टेशन ऑपरेटर, पॉवर प्लांट ऑपरेटर, हेल्पर और सुरक्षा सैनिकों को साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य रूप से दिया जाए।
- सुरक्षा के सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाए।
- मप्र के बिजली क्षेत्र से ठेकेदारी कल्चर खत्म कर आउटसोर्स रिफार्म नीति बनाई जाए।
- आउटसोर्स कर्मचारियों को बिजली कंपनी में मर्ज किया जाए।
- वेतन में बढ़ोतरी की जाए।
- ठेका श्रमिकों को बोनस भी दिया जाए।
- आउटसोर्स कर्मचारियों को 3 माह का तकनीकी प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से मिलें।
- आउटसोर्स कर्मचारियों को उनके गृह स्थान से अधिकतम 5 किमी से अधिक की दूरी पर ट्रांसफर नहीं किया जाए।
- 45 साल की उम्र पार कर चुके ठेकाकर्मियों को 60 वर्ष तक सेवा में रखा जाए।
- स्वास्थ्यकर्मियों की तरह 3 हजार रुपये का प्रोत्साहन भत्ता प्रदान किया जाए।
- पॉवर ग्रिड और सब स्टेशन व पॉवर प्लांट ऑपरेटरों को कुशल श्रमिक के स्थान पर उच्च कुशल श्रमिक का मासिक मानदेय प्रतिमाह दिया जाए।
बता दे कि ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने एक बार फिर उन्हें आश्वासन दिया है, लेकिन कर्मचारी लिखित आश्वासन पर अड़े है। बिजली कर्मचारियों का कहना है की उन्हें मंत्री के द्वारा एक बार फिर सिर्फ आश्वासन दिया गया है, लेकिन लिखित में कोई बात नहीं कही गई है। यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी तब तक उनकी मांगों को नहीं मान लिया जाता।
बिजली कर्मचारियों ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर उनका प्रतिनिधि मंडल 23 अगस्त को ऊर्जा मंत्री से मिला था, उस दौरान मंत्री ने समस्या का निपटारा कर मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था। मंत्री ने आश्वासन दिया लेकिन लिखित में कोई भी मांग अभी तक नहीं मानी, यदि उन्हें लिखित में मांगों को पूरा करने का आश्वासन मिलता तो कर्मचारी हड़ताल का विकल्प नहीं चुनते।


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