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सिहोरा : मोदी सरकार कह रही हरे भरे पौधे लगाओ, प्रकृति बचाओ : पर यहाँ  भू माफिया ने प्रशासन की सांठगांठ से पूरा आम का बगीचा कर दिया साफ़ देखें video

सिहोरा : मोदी सरकार कह रही हरे भरे पौधे लगाओ, प्रकृति बचाओ : पर यहाँ भू माफिया ने प्रशासन की सांठगांठ से पूरा आम का बगीचा कर दिया साफ़ देखें video

  • जबलपुर के गोसलपुर थाना अंतर्गत धर्मपुरा गाँव का मामला  : ग्रामीणों का कहना कई दशकों से चरोखर औऱ आम की बगीचा की भूमि रही है
  • कॉलोनाइजर राजू पटैल का कारनामा , बोल रहें मैंने पूरा सिस्टम ख़रीद लिया ,सब अधिकारी मेरी जेब में हैं 

देखें video- https://www.facebook.com/111571187006513/posts/196579401839024/

द लोकनीति डेस्क भोपाल 
पूरा विश्व जहां कोरोना जैसी गंभीर बीमारी से बुरी तरह जूझ रहा है । इस बीमारियों से बचने के लिए डॉक्टर प्रकृति के बीच जाने की बात करते हैं, ताज़ी हवा लेनी की बात कहते हैं,  जो हमें बड़े पेड़ो से मिलती है। बचपन में  हम सभी की शिक्षा में इतना तो बताया है कि पेड़ों से हमें जीवन मिलता है, ये हमें ऑक्सीजन देते हैं जो हमारे शरीर के लिये अति आवश्यक है । इतना पढ़ने लिखने के बाद भी यदि हम इन पेड़ों को काट रहे  हैं तो हमसे बुरा कौन हो सकता है, न जाने कितने दशकों से इन बड़े वृक्षों ने हमें फ़ल -छाया सब दिया औऱ बदले में हम इन्हें काट रहे केवल अपने स्वार्थ के लिए। यही स्वार्थ इंसान के लिए तब भारी पड़ता है जब प्रकृति अपना खेल शुरू करती है ,तब इंसान -इंसान को नहीं देखता वह स्वयं त्राहि -त्राहि हो जाता है। आपने कितने आंदोलन औऱ सरकार की प्रकृति को बचाने के लिए न जाने कितने हजारों करोड़ों  के विज्ञापन देख लिये होंगे। उसके बावजूद भी सरकार के नुमाइंदे औऱ लालची लोग इन हरे -भरे पेड़ो के बगीचों को तहस -नहस करने में तुले हुए हैं ।
बड़े भारी पेड़ो के गिराने के बाद कहते है तूफ़ान से गिर गया : ऐसा चलता है खेल


जबलपुर जिले के तहसील सिहोरा मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत धरमपुरा में पिछले 2 माह से कई दशकों से रही सरकारी चरोखऱ की भूमि पर आम का बगीचा है,  जिसे मुम्बई के बिज़नेसमेंन राजू पटेल ने सरपंच औऱ स्थानीय रसूखदारों की मदद से पहले तो वहाँ पर रह रहे गरीबों के सरकारी पट्टे हटाये औऱ अब वहाँ कॉलोनी बनाए जाने की तैयारी के लिए दशकों से लगे आम के पेड़ों को काटा जा रहा है। यहाँ सब मामला इतना सेट है कि न अधिकारियों का डर है क्योंकि जिम्मेदार अधिकारी को जेब में रखने की बात बिज़नेसमेन राजू पटेल पहले ही कह चुका है। 
ख़ैर यह सिस्टम है ऐसा ही चलता है । यदि कोई ग़रीब ऐसा करता तो उसके लिए नियम -कानून का अंबार लगा दिया होता है। पर यहाँ 2-4 पेड़ों का मामला नहीं है पूरे बगीचे का है, ऊपर से वहां रह रहे लोगों को सरकार ने ही पट्टा दिया था पर जब सरकार के नुमाइंदे आपके साथ हो तो डरने की क्या बात है। तान दो जहां तक तानना है पिलर-खम्बे  अपने मनमुताबिक नपाई तुलाई से पहले ही ग़रीब परिवार के घरों को गिरा दिया गया है।
जेब पहले से ही गर्म , इसलिए प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा  

नेता औऱ अधिकारी का प्रकृति प्रेम केवल अखबारों की अच्छी फ़ोटो वाले वृक्षारोपण के लिए है।

अभी तक इस विषय में प्रशासन का एक भी  अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा,  क्योंकि उनकी जेब पहले से ही गर्म कर दी गई है। नेता औऱ अधिकारी का प्रकृति प्रेम केवल अखबारों की अच्छी फ़ोटो वाले वृक्षारोपण के लिए है।  ख़ैर इस बकवास मुद्दे को लेकर न सरकार को फुर्सत है न जबलपुर कलेक्टर को कि  वे यहाँ फ़ोन घुमाकर काम को रोक दे,  क्योंकि शिवराज सरकार मोदी सरकार का बाजा चुनाव में बजाने की तैयारी में है औऱ चुनाव में व्यस्त है। उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत नही है वे प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलिंडर भिजवा रहे ,कोई भी नेता प्रकृति प्रेमी केवल अखबारों की अच्छी फ़ोटो वाले वृक्षारोपण के लिए मात्र करते है । उनका प्रेम यही तक सफ़र कर पाता है।

इनका कहना  

मामला मेरी जानकारी है लेकिन इसकी कोई लिखित शिकायत मुझे नहीं मिली है। ग्रामीण  लिखित शिकायत करते है तो जांच कराकर संबंधित के ख़िलाफ़ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 
राकेश चौरसिया, तहसीलदार सिहोरा 

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