मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल का बड़ा दावा, "MSP" नहीं "MRP" पर अपनी फसल बेचेंगे MP के किसान, जाने बड़े दावे की हकीकत
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मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल का बड़ा दावा, “MSP” नहीं “MRP” पर अपनी फसल बेचेंगे MP के किसान, जाने बड़े दावे की हकीकत
भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:-
मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल सिंह पटेल ने किसान आंदोलन को देखते हुए अब मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है.
उन्होंने कहा है कि हमारे प्रदेश के किसान एमएसपी पर नहीं एमआरपी पर अपने फसल को बेचेंगे, पर कृषि मंत्री के इस दावों के पीछे बड़ा सच कुछ और ही हो सकता है, क्योंकि मध्य प्रदेश व प्रदेश है जहां मंत्री कुछ और कहते हैं और मुख्यमंत्री कुछ और कहते हैं.
अब देखना यह होगा कि कमल पटेल के इस दावे से मुख्यमंत्री मुखर रखते हैं या नहीं…..??
किसानों ने सरकार का प्रस्ताव ठुकरा दिया है और साथ ही यह ऐलान भी किया है कि अगर उनके प्रस्ताव को नहीं माना गया तो वह देश पर के ट्रेन को रोकेंगे…।।
12 दिसंबर से किसान आंदोलन का नया प्लान..अब आगे क्या होगा??
किसानों का आंदोलन आज भी लगातार जारी है. अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं.सिंघु बॉर्डर पर लगातार चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बॉर्डर पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात है।
किसानों का कहना है कि कृषि कानून पर बात होगी जबकि सरकार कह रही है कि किसान एक बार फिर से विचार कर लें. पर वह अपने बात पर अड़े हुए हैं.
किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. किसानों का कहना है कि जब तक कानून वापस नहीं लिया जाता तब तक हम यहीं रहेंगे.. दिल्ली किसानों से चारों तरफ से घिर गई है.
किसान संगठनों की अपनी मांगों को लेकर सरकार के साथ पांच दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन बात नहीं बन पाई हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने भी मंगलवार को किसान संगठनों के 13 नेताओं से बातचीत की थी, लेकिन उसमें भी कोई हल नहीं निकल पाया था। उसके बाद बुधवार को सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली छठे दौर की वार्ता रद्द कर दी गई थी।
हालांकि, मंगलवार की बैठक में तय हुआ था कि सरकार किसानों को लिखित में प्रस्ताव भेजेगी। जिसके बाद सरकार की ओर से बुधवार को प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन किसानों को ये पसंद नहीं आया, और किसानों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
लिखित प्रस्ताव में एमएसपी की गारंटी समेत मंडी को लेकर वादे किए गए। कृषि कानूनों को वापस लेने पर तो सरकार राजी नहीं है, लेकिन संशोधन प्रस्तावों में एपीएमसी को मजबूत करने की बात कही गई। विवाद की सूरत में स्थानीय अदालत जाने का अधिकार दिया गया। पराली जलाने पर सख्त कानून में ढील की भी बात कही गई। लेकिन किसान संगठनों ने सरकार के इस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया।
इधर, किसान नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन में यहां कहा कि सरकार अगर दूसरा प्रस्ताव भेजे तो वे उन पर विचार कर सकते हैं। किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि अगर तीनों कानून रद्द नहीं किये गए तो एक के बाद एक दिल्ली की सड़कों को बंद किया जाएगा और किसान सिंघु बॉर्डर पार कर दिल्ली में प्रवेश करने के बारे में भी फैसला ले सकते हैं। कक्का ने बताया कि इन कानूनों के विरोध में किसान 14 दिसंबर को राज्यों में जिला मुख्यालयों का घेराव करेंगे और 12 दिसंबर को दिल्ली-जयपुर राजमार्ग बंद किया जाएगा। साथ ही 12 दिसंबर को सभी टोल प्लाजा फ्री करेंगे।
इसके साथ ही किसानों ने अब नया ऐलान करते हुए कहा है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं होती है तो वह देश भर की ट्रेनें रोकेंगे।



