सारी अटकलों पर विराम : फिर कैलाश विजयवर्गीय को बनाया गया महासचिव, ये है इसके सियासी मायने

भोपाल/खाईद जौहर : गुरुवार दोपहर तक कैलाश विजयवर्गीय की अगली भूमिका को लेकर जो कयास लगाए जा रहे थे, उन पर विराम लग गया है। क्योंकि पार्टी ने उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय कार्यसमिति में महासचिव की जिम्मेदारी दी है। इसके साथ ही अब यह तस्वीर स्पष्ट हो चुकी है कि कैलाश विजयवर्गीय का मप्र की राजनीति में दखल नहीं होगा और उन्हीं कोई और जिम्मेदारी दी जाएगी।
वर्तमान स्थिति की बात करे तो सांसद शंकर लालवानी व जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट की इंदौर में ज्यादा सक्रियता है। यह सक्रियता कोरोनाकाल से ही है और इंदौर से जुड़ी उन्हीं की राय व निर्णय पार्टी स्तर पर लिए जा रहे हैं। इनके साथ भी अब स्थानीय अन्य नेता मधु वर्मा, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता की भी सिंधिया गुट से नजदीकी बढ़ती जा रही है।
कैलाश विजयवर्गीय को लेकर लगाए जा रहे थे यह कयास
मालूम हो कि साल 2018 में हुए मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बात की अटकलें थी के मुख्यमंत्री अब कैलाश विजयवर्गीय होंगे, लेकिन कांग्रेस सत्ता में आई। इसके बाद जब साल 2020 में सत्तापरिवर्तन हुआ, तब भी इस बात की चर्चा ज़ोरो पर थी के मुख्यमंत्री की कमान विजयवर्गीय को दी जाएगी, लेकिन पार्टी ने शिवराज पर भरोसा जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री की कमान सौंपी।
इसके पूर्व लोकसभा चुनाव के दौरान जब शंकर लालवानी का नाम तय नहीं हुआ था, तब भी उनके समर्थकों को विश्वास था कि विजयवर्गीय को इंदौर से लोकसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है। तब विजयवर्गीय के पास पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी थी।
पश्चिम बंगाल में निभाई अहम भूमिका
पश्चिम बंगाल में चुनाव के पहले तृणमूल कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में आ गए और इससे भी विजयवर्गीय का कद बढ़ा। चुनाव में भाजपा की हार के बावजूद विजयवर्गीय का मजबूत पक्ष यह था कि कई हारी हुई सीटों पर वोटों का अंतर बहुत कम था। उस दौरान माना जाने लगा की विजयवर्गीय को केंद्र में कोई बड़ी ज़िम्मेदारी दी जा सकती है।
राज्यसभा जानें पर अटकलों का दौर
कुछ समय पहले ही पार्टी के एक धड़े ने यह भी प्रचारित किया कि राज्यसभा की एक सीट के लिए होने जा रहे उपचुनाव में मप्र कोटे से विजयवर्गीय का नाम तय किया जा सकता है, लेकिन पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने डॉ. एल मुरुगन के नाम पर मोहर लगा दी, जो अब केंद्र में सूचना प्रसारण मंत्री है।
बहरहाल, अब कैलाश विजयवर्गीय को एक बार फिर राष्ट्रीय कार्यसमिति में महासचिव की जिम्मेदारी देने के बाद कहीं न कहीं यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी उन्हें अब चुनाव नहीं लड़ाना चाहती। पहले उन्हें पश्चिम बंगाल चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी, अब कहा जा रहा है कि आने वाले चुनाव में फिर उन्हें किसी राज्य की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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