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कहा जाता है वादे वही करो जिसे आप पूरा कर सको, कांग्रेस ने अपने शपथ पत्र में वादे तो कर दिए पर अब उन्हें पूरा करने में साँसे फूल रहीं हैं

 

आपको बता दें कि कांग्रेस सरकार के 1 साल पूरे हो चुके हैं, पर कुछ बेसिक चीजें हैं जिनको कांग्रेस ने अपने शपथ पत्र में शामिल किया था और कहा था कि जैसे ही सरकार बनेगी वैसे ही शपथ पत्र में किए गए वादे पूरे करेंगे। आपको पता ही है कि आज पेट्रोल-डीजल के भाव आसमान में पहुंच चुके हैं। पड़ोसी देशों की तुलना में सबसे महंगा पेट्रोल और डीजल हमारे देश यानी भारत में ही है। और अगर राज्यों की बात की जाए तो सबसे महंगा पेट्रोल और डीजल मध्यप्रदेश में है।

कांग्रेस ने अपने शपथ पत्र में वादा किया था कि हम पेट्रोल और डीजल पर करों में छूट देंगे, जिससे हमारे राज्य के निवासियों को सस्ता पेट्रोल और डीजल मिल सके। 2018 में मध्यप्रदेश में पेट्रोल का प्राइस 88 रुपए को पार कर गया था, उस समय कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया था। जैसे ही मध्यप्रदेश विधानसभा का चुनाव नजदीक आया उसी का फायदा उठाते हुए, कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल को कम करने का वादा कर दिया। कांग्रेस को वादा करना था कर दिया, सरकार बननी थी बन गयी अब वादों और जनता से क्या मतलब।

कांग्रेस सरकार के 1 साल बीत चुके हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ यह भूल गए हैं कि हमने क्या क्या वादे किये थे। वित्त मंत्री तरुण भनोट जी 1 साल कम समय नहीं होता। पेट्रोल-डीजल के करों में कमी आप 1 साल में नहीं कर पाए। तो आपको और कितने साल चाहिए। मध्य प्रदेश की जनता ने आप की सरकार पर भरोसा जताया है कि आप उनकी भलाई के लिए काम करेंगे ऐसा कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। जनता जानना चाहती है

कि आखिर उन्हें कब पेट्रोल-डीजल से राहत मिलेगी। कब आप करों में कमी करेंगे। चुनाव से पहले कांग्रेस बड़ी-बड़ी बातें करती थी पर अब जब वादे पूरे करने का समय आया, तो वित्तमंत्री समेत सभी मंत्री चुप्पी साधकर बैठ गए हैं। वित्त मंत्री तरुण भनोट जी आप की जनता आपसे पेट्रोल-डीजल में राहत चाहती है, कब मिलेगी राहत ? आइए और जनता से रूबरू होकर उनके इन सवालों का जवाब दीजिए।

 

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