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केन्द्रीय विद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय सारंगी वादक श्री हुसैन ने दी अपनी प्रस्तुति

 

  • सारंगी का अविष्कार रावण ने किया था – श्री सरवर हुसैन

बड़वानी से देव नागझिरिया की रिपोर्ट- स्पीक मैके बड़वानी के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय सारंगी वादक एवं पदम्श्री से सम्मानित उस्ताद श्री अब्दुल लतीफ खाॅ के पोते श्री सरवर हुसैन ने अपनी प्रस्तुति केन्द्रीय विद्यालय बड़वानी में दी । इस दौरान उन्होने युवाओं को सारंगी के इतिहास से भी अवगत करवाया । 
    स्पीक मैके बड़वानी के कार्यक्रम संयोजक श्री अनिल जोशी ने बताया कि बुधवार की प्रातः केन्द्रीय विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान कलकता के संगीत रिसर्च एकेडमी के साथ कार्य कर रहे श्री सरवर हुसैन ने अपनी प्रस्तुति दी । इस दौरान तबले पर उनका साथ उनके चाचा उस्ताद श्री नफीस एहमद खान द्वारा दिया गया ।
    कार्यक्रम के दौरान श्री सरवर हुसैन ने बताया कि सारंगी का अविष्कार महान विद्वान रावण ने किया था । प्रारंभ में इसमें एक ही तार था । रावत इसको बजाकर पूजा करते थे, जिसके कारण इसको रावण का हत्था भी कहा जाता हैै। उन्होने बताया कि वर्तमान में पूर्ण सारंगी में 43 तार होते है। इसमें से 3 प्रमुख तार होते है। इसको बुजूर्गो ने सौरंगी नाम दिया था । जिसका अर्थ है, संगीत के सौ रंग। 
    उन्होने बताया कि हिन्दूस्तान का लोकसंगीत बहुत समृद्ध है, जिसके कारण 100 किलोमीटर में ही संगीत का स्वरूप बदल जाता है। इसके पश्चात् भी हिन्दूस्तान में उच्चकोटी के सारंगी बजाने वाले कलाकारो की संख्या बमुश्किल 10 से 15 है। 
    कार्यक्रम का शुभारंभ श्री हुसैन ने राग बसंत, मुखारी से किया । तत्पश्चात् उन्होने विद्यार्थियो की मांग पर उन्हें राजस्थानी मांड केसरिया बालम की प्रस्तुति दी । जिसने युवाओं को भावविभोर कर दिया । 
    इस अवसर पर संस्था के प्राचार्य श्री कुंदन राठौर, स्पीक मैके के श्री गुरमीतसिंह गाॅधी, सुश्री सुनिता शुक्ला, श्री शिवम शर्मा सहित संस्था के संगीत शिक्षक श्री सतीष गोठरवाल सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे ।

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