मप्र उपचुनाव: रैगांव में चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में जरूरी मुद्दे गायब, जातिगत समीकरण पर आकर थमा चुनावी अभियान

मप्र उपचुनाव: चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में जरूरी मुद्दे गायब, जातिगत समीकरण पर आकर थमा चुनावी अभियान
- दोनों ही मुख्य पार्टियों ने लगाया एड़ी चोटी का दम
- सबसे ज्यादा सभाएं सीएम शिवराज ने की
- चुनाव के आखिरी दौर में जरूरी मुद्दे गायब, जातिगत समीकरण बना अहम
रैगांव/गरिमा श्रीवास्तव:- मध्य प्रदेश में उपचुनाव की तारीख अब बेहद करीब आ चुकी है. दोनों ही मुख्य पार्टी बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी एड़ी चोटी का दम चुनावी प्रचार प्रसार के दौरान लगा लिया. अब यह प्रचार प्रसार थम चुका है. मध्य प्रदेश में उपचुनाव में जीत दर्ज कराने के लिए सबसे ज्यादा सभाएं शिवराज सिंह चौहान ने की.
रैगांव विधानसभा में दोनों ही पार्टियों के स्टार प्रचारक ने अपने भाषणों में पूरा दम दिखाया. जनता को तरह-तरह की बातें कहकर खूब लुभाया गया.
निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी पूरी ताकत झोंक दी. लेकिन बगावत के माहौल से शुरू हुआ चुनाव अभियान जातिगत समीकरण पर आ कर थम गया. मुद्दे हवा हो गए. यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी की प्रतिमा बागरी और कांग्रेस की कल्पना वर्मा के बीच है.
जातिगत समीकरण पर टिकी प्रत्याशियों की निगाहें:-
चुनाव प्रचार प्रसार के आखिरी दौर में ऐसा जान पड़ा कि जरूरी मुद्दे गायब हो चुके हैं.इस दौरान पार्टियों ने अपने प्रचार अभियान में जातीय समीकरणों पर फोकस रखा. दलों ने जो जातीय समीकरण तैयार किये हैं उसके अनुसार रैगांव विधानसभा क्षेत्र के 70 फीसदी मतदाता जाति गत समीकरण में बंटे हुए हैं. विधानसभा में सर्वाधिक मतदाता ब्राह्मण और चौधरी वर्ग के हैं. उन्हें साधने के लिए दोनों दल एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं. रैगांव सीट पर छह मन्त्रीयों ने अलग-अलग जगहों पर जाकर अपना प्रभाव दिखाया.कांग्रेस भी पीछे नहीं रही.
2 नवंबर को स्थिति साफ:-
3 विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर 30 अक्टूबर को चुनाव होने हैं वही 2 नवंबर को मतगणना किया जाएगा 2 नवंबर को यह स्थिति साफ हो जाएगी कि मध्य प्रदेश में इन चारों उपचुनाव की सीटों पर किस पार्टी ने अपना कब्जा बनाया है. हालांकि दोनों ही पार्टियां अपनी अपनी जीत का दावा कर रही हैं.
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