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पिछले 10 सालों में मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर सबसे ज्यादा, इस कारण से तोड़ देते हैं दम, जानिए इन शहरों में हैं गंभीर हालात.. 

भोपाल/निशा चौकसे:- मध्यप्रदेश में बीते 10 वर्षों से शिशु मृत्यु दर के मामलों में देश में शीर्ष पर है. यह जानकारी भारत सरकार की एक इकाई द्वारा हाल ही में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम बुलेटिन के आकड़ों से सामने आई है. आकड़ों के अनुसार साल 2009 में प्रति हजार शिशु मृत्युदर 67 वर्ष 2014 तक 52 और 2019 में 46 हैं. दावा यह है कि प्रदेश की शिशु मृत्युदर सूडान जैसे देश की तुलना में भी ख़राब है. विशेषज्ञ बीते एक दशक में शिशु मृत्युदर सुधार के लिए राज्य सरकार के उपायों का जमीनी रूप से बेहतर क्रियान्वयन न होना बड़ी वजह बताते हैं. ज्ञात हो कि प्रदेश में औसतन 20 लाख शिशु हर साल पैदा होते हैं, इनमे लगभग 92 हजार विभिन्न कारणों से दम तोड़ देते हैं. जन्म लेने के 42 दिन तक बच्चे हाई रिस्क में होते हैं. इस दौरान उन्हें कोई भी गंभीर बीमारी हो सकती है. 

ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति है ज्यादा ख़राब 
मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति शहरी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा ख़राब है. ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्युदर प्रति हजार 50 है, शहरी क्षेत्रों में प्रति वर्ष प्रति एक हजार पर 32 शिशु दम तोड़ते हैं. देश के 21 बड़े राज्य और 9 छोटे राज्य समेत 6 केंद्र शाषित राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में ज्यादातर शिशु की मृत्यु जन्म लेते ही हो जाती है. 

पोषकतत्वों की कमी है कुपोषण का बड़ा कारण 
इंदौर भोपाल और उज्जैन के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कई आशा एवं आशा कार्यकर्ताओं के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में बैठने वाले आहार में जरूरी पोषक तत्वों का अभाव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और सुविधाओं का ना होना शिशु मृत्यु दर में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण है. उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण आहार और स्वास्थ्य सुविधाओं की जननी तक आसान पहुंच सुनिश्चित की जाए तो समस्या का समाधान शीघ्र किया जा सकता है. 

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