जब नेताओं को "वतन" से ज्यादा "वेतन" की, "अन्नदाता" से ज्यादा "चंदा दाता" की चिंता हो, तो देश के भविष्य की रक्षा आखिर कैसे हो..??

जब नेताओं को “वतन” से ज्यादा “वेतन” की, “अन्नदाता” से ज्यादा “चंदा दाता” की चिंता हो, तो देश के भविष्य की रक्षा आखिर कैसे हो..??
द लोकनीति डेस्क:गरिमा श्रीवास्तव
देश में किसान आंदोलन विशाल रूप लेता जा रहा है. जगह-जगह के टोल नाकों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है. आज किसानों ने सभी टोल नाकों को फ्री करने का ऐलान किया था.
पर केंद्र में बैठी सरकार सब कुछ चुपचाप देख रही है, वह अपने प्रस्ताव रख रही है जिसे किसान मानने को हरगिज तैयार नहीं है.
उनके सिर्फ एक ही मांग है कि कृषि बिल को हर हाल में खत्म किया जाए. जबकि सरकार इस बात पर अड़ी है कि वह कृषि बिल में संशोधन कर सकती है पर खत्म नहीं कर सकती..
किसानों ने देश में ट्रेन बंद करने का भी ऐलान कर दिया है.. उनका कहना है कि अगर जल्द से जल्द उनकी मांगे पूरी नहीं की गई तो देश भर की सभी ट्रेनों को रोक दिया जाएगा..
एक तरफ जहां किसान आंदोलन कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ राजनेता अपने वतन की चिंता करने की बजाय वेतन की चिंता कर रहे हैं. उनके लिए नेशन से ज्यादा कमीशन महत्व रखता है. जिस वक्त उन्हें अन्नदाता की चिंता करनी चाहिए उस वक्त वह चंदा दाता की चिंता करते हैं. किसान आंदोलन के दौरान 11 किसानों की मौत हो गई, केंद्र में बैठी सरकार के नेताओं ने उस पर कोई ट्वीट नहीं किया पर अंबानी के घर छोटे अंबानी ने जन्म क्या लिया बधाइयों का तांता लग गया..
अब बधाईयों का ताँता लगे भी क्यों ना आखिर वह अंबानी है. जिससे भाजपा सरकार खूब फायदा इकट्ठा कर रही है और उन्हें भी खूब फायदा पहुंचा रही है.
जिस वक्त किसान आंदोलन कर रहे हैं उस वक्त शीर्ष कुर्सी पर आसीन नए-नए संसद भवन का इनॉग्रेशन कर रहे हैं.
अब ऐसे में जन आंदोलन हो भी क्यों ना.. जब इन नेताओं को अन्नदाता से ज्यादा चंदा दाताओं की चिंता है तो देश की भविष्य की रक्षा नए संसद भवन से नहीं बल्कि जन आंदोलन से ही होगी..
एनएसपी पर सरकार ने सारे पत्ते खोल दिए हैं पर फिर भी किसान उनकी बात मानने को तैयार नहीं है. किसानों का कहना है कि जन आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कृषि बिल को वापस नहीं लिया जाता है…
अब देखना यह होगा कि सरकार आने वाले समय में और क्या क्या करने वाली है… किसान भारी मात्रा में दिल्ली की तरफ कूच कर रहे हैं. आज अमृतसर से लगभग 50000 किसान देश की राजधानी के बॉर्डर तक शाम तक पहुंच जाएंगे.. मध्य प्रदेश राजस्थान से भी भारी संख्या में किसान दिल्ली की तरफ कूच कर चुके हैं…
अब देखना यह होगा कि एमएसपी और क्या-क्या दिन दिखाने वाली है…




