किसान आंदोलन: आखिर क्यों बौखलाई है सरकार ?

किसान आंदोलन: आखिर क्यों बौखलाई है सरकार ?
भोपाल/राजकमल पांडे। किसान आंदोलन के शुरूआती दिनों से केन्द्र से लेकर भाजपा शासित राज्यों में हडकंप मचा हुआ है, जिसके बाद नेताओं आंदोलन को विफल करने का पुरजोर प्रयास किया और अनाप-सनाप बयानबाजी से भी पीछे नहीं रहे हैं, कृषि कानूनों के खिलाफ 18 दिन से चल रहे किसान आंदोलन को दबाने और कुचलने के इरादे से अब भाजपा के पदाधिकारी कमर कस रहे हैं. और रणनीति के तहत मध्यप्रदेश सहित देश भर में हल्ला बोलने की योजना बनाई जा रही है. जिसमें शामिल केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री शिवराज सहित कई दिग्गज नेता मैदान में उतर चुके हैं. जहां किसान चौपाल, सम्मेलन और पंचायतों के जरिए आक्रामक अंदाज में विरोध करेंगे. तीनों कृषि कानून की जमीनी हकीकत बताने के बहाने 15-16 दिसंबर को यह बताया जायेगा कि यह कानून किसानों के हित में है, सरकार किसानों का जहां समझाने में सफल नहीं हो पा रही है, तो अब आक्रामक अंदाज में आने से लाजमी है कि किसान अब अपना रूख और कडा कर सकते हैं ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है. साथ ही नेताओं में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और कृषि मंत्री कमल पटेल इस आंदोलन की खत्म करने की रणनीति बना रहे हैं. और कहा तो यह भी जा रहा है कि किसान आंदोलन के ‘काट’ के रूप में सरकार और संगठन हर स्तर पर अपनी बात प्रचारित करेगी. जबकि यह सरकार की एक रणनीति के तहत होना जिसमें किसानों का फिर छले जाने की योजना तैयार की जा रही है.

.jpeg)


