कमीशन के चक्कर में DMO ने अटका रखा है गरीब किसानों का 24 करोड़ का अनाज़

कमीशन के चक्कर में DMO ने अटका रखा है गरीब किसानों का 24 करोड़ का अनाज़
  • किसान पुत्र CM शिवराज के राज में भी सिहोरा के किसान है बेहद परेशान, DM पर लगाए गंभीर आरोप

मध्यप्रदेश में किसानों की खरीदी 01 दिसंबर से 20 जनवरी की अंतिम दिनांक तक पूरे जबलपुर जिले की धान तुल चुकी थी जिसे सरकार के शासकीय पोर्टल में दर्ज कर किसानों को उनकी खरीदी पावती निकालकर दे दी गई थी। सरकार ने हीं किसानों की धान तौली और खरीदी।

दरअसल यह मामला सिहोरा तहसील के पोंडा का है, यहां किसानों का आरोप है कि जबलपुर DMO विवेक तिवारी 2 किलो प्रति क्विंटल हर सोसायटी से कमीशन काटते हैं। उसी कमीशन में सभी छोटे -बड़े अधिकारियों औऱ सेल्समैन भी हिस्सेदार हैं।

अटका रखा है अनाज़

किसानों का कहना हैं DMO विवेक तिवारी ने पूरे जबलपुर ज़िले की,24 करोड़ की धान रिजेक्शन (rejection) में रखी हैं। इसी रिजेक्शन वाली धान को कलेक्टर द्वारा व्यपारियो को नीलाम करने का सरकारी फ़रमान जारी हुआ।

जिससे यह स्पष्ट होता हैं कि DMO  विवेक तिवारी औऱ अधिकारियों की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ हैं!!

वहीं दूसरी तरफ़ किसानों के खातों में होल्ड लगा दिया गया ,औऱ जब अधिकारी औऱ जिम्मेदारो से पूछा गया तो उनका कहना है कि इन किसानों की धान गुणवत्ताहीन हैं इसलिए इनकी धान का पैसा नहीं दिया जायेगा। अब आलम यह हैं कि छोटे -बड़े किसान अपनी अगली फसलों की तैयारी के लिए साहूकारों से  ब्याज़ लेने पर मजबूर हैं।

जब हमारी टीम "द लोकनीति " ग्राउंड पर पहुंची तो हमें एक किसान ऐसे भी मिले जिनकी आज शादी हैं लेकिन शायद उनकी शादी भी बिना पैसों की बेरँगी सी नजर आई। पूछने पर दुल्हे (किसान) ने बताया कि मेरा लाखों का पैसा धान खरीदी का सरकार ने नहीं दिया,आज मेरी माली हालत अच्छी नहीं हैं ,मुझें पैसों की सख्त जरूरत हैं।

वहीं किसानों के लीडर औऱ भारतीय किसान जबलपुर संभाग अध्यक्ष प्रदीप राय का कहना हैं कि यदि "हमारे सभी किसान भाइयों का धान का भुगतान औऱ खाते से होल्ड नहीं हटाया गया तो ,हम जबलपुर किसान भी मंदसौर जैसी घटना करने से पीछे नहीं हटेंगें ,पहली गोली मेरे सीने में होंगी" 

अब देखना यह होगा कि मध्यप्रदेश सरकार इन किसानों का पैसा आखिर कब तक रोकेंगी, क्या भूमि -स्वामी किसान ,सरकार को चोर डकैत नजऱ आ रहें हैं ?? क्या किसान सरकार से भींख माँग रहें हैं?? क्यों मध्यप्रदेश सरकार किसानों से भेदभाव कर रहीं हैं???