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दमोह : अपने जवान बेटे की स्मृतियों को बनाए रखने के उद्देश्य से संसाधनों से विहीन, पुलिस फिजिकल एवं कोचिंग सेंटर का नि:शुल्क हुआ शुभारंभ

  दमोह से शंकर दुबे की रिपोर्ट : –  अपने जवान बेटे की स्मृतियों को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से संसाधनों से विहीन  ग्रामीण अंचल के युवाओं के लिए तेजगढ़ कस्बे में पुलिस फिजिकल एवं कोचिंग सेंटर का नि:शुल्क शुभारंभ आज हो गया है। इन युवाओं को मास्टर ट्रेनर्स द्वारा तैयारी कराई जाएगी। 
    कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। दुष्यंत कुमार की यह पंक्तियां तेजगढ़ में चरितार्थ होने जा रही हैं। यहां के एक शिक्षक महेंद्र दीक्षित ने अपने बेटे की यादों को जीवंत बनाए रखने के लिए एक अद्भुत संकल्प लिया है। संकल्प ऐसा जिससे एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों युवक-युवतियों की जिंदगी न केवल बदल जाएगी बल्कि संवर भी जाएगी। शिक्षक महेंद्र दीक्षित ने अपने बेटे की याद में आज से एक पुलिस फिजिकल और कोचिंग सेंटर की शुरुआत की है। यह कोचिंग क्लास आगामी 4 मार्च तक चलेगी। जिसमें 40 गांव के करीब डेढ़ सौ युवक-युवती परीक्षा की तैयारी करेंगे।
 क्या क्या होगा कोचिंग में : –
महेंद्र दीक्षित ने बताया कि कोचिंग में 50 लड़कियों और 100 लड़कों का शैक्षणिक और शारीरिक मापदंड के आधार पर चयन किया गया है। जिसमें प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 2 घंटे की फिजिकल फिटनेस होगी।जिसमें दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद, तबा फेक, भाला फेंक आदि क्रियाएं कराई जाएंगी। उसके बाद उन्हें चाय एवं नाश्ता कराया जाएगा। कुछ देर के रेस्ट के बाद उनकी परीक्षा आधारित कोचिंग कराई जाएगी। बच्चों के लिए दूध, अंकुरित चना, मूंगफली, मूंग दाल इत्यादि नि:शुल्क दिए जाएंगे। इसके लिए 40 शिक्षक और 7 फिजिकल ट्रेनर अपनी सेवाएं देंगे।
 40 गांव के बच्चे हैं शामिल : –
 दीक्षित ने बताया कि इसमें हर्रई, समदई, केवलारी, पतलोनी, करौंदी पड़रिया, पटेरिया, पटेरिया, राजघाट, झलौन, केवलारी उपाध्याय, परासई सहित 40 गांव के बच्चों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
 किताबें भी देंगे मुफ़्त 
 दीक्षित बताते हैं कि इनमें करीब 30 बच्चे ऐसे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। इन बच्चों को सभी महंगी किताबें नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अलावा सभी बच्चों को सिलेबस भी दिया जाएगा।
 ऐसे बदल गई एक शिक्षक की जिंदगी : –
 दीक्षित बताते हैं कि उनका बड़ा बेटा विभु इंदौर में पीएससी की कोचिंग कर रहा था। जब वह घर आया तो उसकी बाइक का सर्रा के निकट एक्सीडेंट हो गया तथा उसकी मौत हो गई। अपने बेटे की मौत के बाद तय किया कि वह अपने बेटे को तो नहीं बचा पाए, लेकिन संसधनों से विहीन ग्रामीण युवाओं को अपनी संतान मानकर उन्हें जरूर योग्य बनाएंगे। इस तरह उन्होंने बच्चों का कैरियर संवारने की दिशा में शुरुआत कर दी। क्षेत्र के जनपद सदस्य सचिन मोदी बताते हैं कि यदि महेंद्र दीक्षित का बेटा हेलमेट लगाए होता तो संभवत उसकी जान बच सकती थी। अपने बेटे की मौत से अनुभव लेते हुए उन्होंने उसकी तेरहवीं में 100 हेलमेट लोगों को बांटे थे।                                                                                                                                                                                                                                  

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