दमोह उपचुनाव हार : मुख्यमंत्री तो ज़िम्मेदारी लेंगे नहीं.. कुछ बातें ऐसी हैं, जो दिल्ली जाकर बताऊंगा - जयंत मलैया

दमोह उपचुनाव हार : मुख्यमंत्री तो ज़िम्मेदारी लेंगे नहीं.. कुछ बातें ऐसी हैं, जो दिल्ली जाकर बताऊंगा - जयंत मलैया

मध्यप्रदेश/दमोह - मध्यप्रदेश के दमोह उपचुनाव में हार का मुंह देखने वाली भाजपा में अंतर कलह और दर्द उभरकर सामने आने लगा हैं। दरअसल, 2 मई को दमोह सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे घोषित किए गए जिसमें कांग्रेस के उम्मीदवार अजय टंडन को भारी मतों से जीत हासिल हुई। अजय टंडन ने बीजेपी के राहुल लोधी को 17089 मतों से पराजित किया।

चुनाव हारने के बाद राहुल लोधी ने हार के लिए पूर्व मंत्री जयंत मलैया को जिम्मेदार ठहराया हैं। उन्होंने कहा कि मलैया परिवार ही मूल रूप से चुनाव हराने का जिम्मेदार हैं। मलैया जी के पास पूरे शहर की जिम्मेदारी हैं। हम उनके वार्ड से भी हार गए। राहुल लोधी ने इसपर कार्यवाही करने की मांग की थी।

वहीं, शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने जयंत मलैया को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

अब इस मामले में पूर्व मंत्री जयंत मलैया ने चुप्पी तोड़ी हैं। मलैया ने कहा कि चुनाव का परिणाम आने से पहले ही राहुल से कहलवा दिया या उनके खुद ही कहा कि मलैया के कारण हार गए। अब नोटिस मिला है, तो 2-3 दिन में भोपाल जाकर जबाव दूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद दिल्ली जाऊंगा। कुछ ऐसी बातें हैं, जो दिल्ली में ही बताना पड़ेंगी।

उन्होंने कहा- सिर्फ मेरा बूथ नहीं हारी भाजपा। राहुल लोधी खुद अपना वार्ड हार गए। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जहां रहते हैं, वह वार्ड हार गए। जिला पंचायत और नगर पालिका अध्यक्ष का वार्ड भी हार गए। अब हार का ठीकरा किसी पर तो फोड़ना था, तो मुझ पर और मेरे बेटे पर फोड़ दिया। शिवराज जी हार की जिम्मेदारी तो लेंगे नहीं।

मलैया ने कहा कि हार का ठीकरा मुझ पर इसलिए फोड़ा गया है, क्योंकि मेरी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल से बनती नहीं है। उन्होंने राज्यसभा सांसद की सभा में मुझे और गोपाल भार्गव को पूतना (छलकपटी) कहा था। सभा में ही उन्होंने कह दिया था कि लड़ना है, तो मुझ से लड़ो, उससे (राहुल लोधी) क्यों लड़ रहे हो? इससे माहौल ज्यादा खराब हो गया। उन्हें सार्वजनिक मंच से ऐसा नहीं कहना था।

मलैया ने बताया कि चुनाव की अंतिम रैली में मैंने और गोपाल भार्गव ने मोर्चा संभाला था, क्योंकि मुख्यमंत्री का फोन आया गया था कि वे नहीं आ रहे हैं। आप लोग रैली को संभालेंगे। उस रैली में सिंधिया भी नहीं पहुंचे थे, लेकिन मैं और गोपाल भार्गव 14 अप्रैल को राहुल की अंतिम चुनावी रैली में शामिल हुए थे।

फिर कैसे कह सकते हैं कि राहुल की हार मेरे कारण हुई।