
नई दिल्ली : द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने जा रहीं है, उन्होंने गुरुवार को एक तरफा जीत हासिल की। लेकिन इस जीत में विपक्ष का बड़ा हाथ नज़र आ रहा है। दरअसल, मुर्मू के पक्ष में 14 राज्यों के 121 विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने का दावा किया जा रहा है। खासतौर पर उन राज्यों में क्रॉस वोटिंग ज्यादा हुई है, जहां पर कांग्रेस सत्ता पक्ष या विपक्ष में है। इसके अलावा 17 सांसदों ने भी इस राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग की है।
बीजेपी नेताओं के मुताबिक गुजरात के 10, असम के 22, उत्तर प्रदेश के 12, बिहार और छत्तीसगढ़ के 6-6 और गोवा के 4 विधायकों ने मुर्मू के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। हालांकि, भाजपा नेताओं ने दावा किया था कि द्रौपदी मुर्मू निर्वाचक मंडल का लगभग 70 प्रतिशत वोट हासिल करेंगी. लेकिन राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु जैसे प्रमुख राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सत्ता जाने और मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में भाजपा की सीटों में गिरावट ने एनडीए उम्मीदवार के मतों में गिरावट में योगदान दिया।
बता दे कि एनडीए उम्मीदवार ने कुल 4701 वैध मतों में से 2824 मत हासिल किए, जबकि संयुक्त विपक्ष के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा के पक्ष में सिर्फ 1877 मत पड़े। मुर्मू ने कुल वैध मतों का 64.03 प्रतिशत हासिल किया, जो कि 2017 में निवर्तमान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से कम है। उन्हें कुल मतदान का 65.65 प्रतिशत हासिल हुआ था।
वहीं, साल 2022, 2023 और 2024 में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के संदर्भ में कांग्रेस के लिए यह खतरे की घंटी है।चूंकि, पुरे विपक्ष ने एक साथ होकर यशवंत सिन्हा को UPA का उम्मीदवार बनाया। लेकिन अंत में बड़ी संख्या में क्रॉस वोटिंग होना, विपक्ष के एक जुट होने पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यह विपक्षी दलों में विभाजन और भ्रम का भी सबूत है। क्योंकि, कई क्षेत्रीय दलों ने भाजपा के खिलाफ अपने पॉलिटिकल स्टैंड के बावजूद, राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मू को देखने की इच्छा व्यक्त की थी।