हालात गंभीर! भोपाल में 700 संक्रमित वेंटिलेटर पर, पोर्टल पर दिखाई जा रही है गलत जानकारी

हालात गंभीर! भोपाल में 700 संक्रमित वेंटिलेटर पर, पोर्टल पर दिखाई जा रही है गलत जानकारी

मध्यप्रदेश/भोपाल - राजधानी भोपाल में कोरोना का केहर लगातार बढ़ता ही जा रहा हैं। हालात ऐसे है कि शहर के 51 सरकारी और निजी अस्पतालों में मौजूद 900 से ज्यादा वेंटिलेटर में से 700 पर संक्रमित भर्ती हैं। इनमें भी कई मरीज गंभीर हैं। प्रशासन का दावा है कि वेंटिलेटर की स्थिति की जानकारी सार्थक पोर्टल पर हर दिन अपडेट की जा रही है, जबकि हकीकत ये है कि पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी गलत हैं। पोर्टल हमीदिया में 21 मरीज वेंटिलेटर पर होना बता रहा है, जबकि अभी यहां के सभी 60 वेंटिलेटर फुल हैं।

हालांकि, भोपाल में जितने गंभीर मरीज हैं, उस हिसाब से वेंटिलेटर पर्याप्त हैं, लेकिन आसपास के शहरों से आने-वाले अधिकांश मरीज गंभीर हैं। इनसे वेंटिलेटर भरे हुए हैं। चूंकि, ये मरीज चार से पांच दिन बाद भोपाल रैफर किए जा रहे हैं, इसलिए इनकी हालत बिगड़ी हुई रहती हैं। जबकि जो 50 वेंटिलेटर बचे हैं, वो निजी अस्पतालों में हैं, लेकिन यहां ऑक्सीजन सपोर्ट, हाईफ्लो ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है, ऐसे में कब इन मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाए, कहा नहीं जा सकता। इसलिए इन अस्पतालों ने वेंटिलेटर रिजर्व कर रखे हैं। वे इन्हें फुल बता रहे हैं। 

एक्सपर्ट व्यू की राय मानें तो पहले वेंटिलेटर वाले मरीज औसतन 10 दिन में डिस्चार्ज हो जाते थे, लेकिन अब हालात अलग हैं। अब उन्हें 20 से 25 दिन या उससे ज्यादा समय रिकवर होने में लग रहा हैं। ऐसा नए स्ट्रेन के कारण हो रहा हैं। यही वजह है कि वेंटिलेटर ज्यादा समय के लिए भरे रहते हैं। हमीदिया में तो कई मरीज तीसरे-चौथे हफ्ते तक वेंटिलेटर पर हैं।

बता दें कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने अप्रैल के 10 दिन में 40 वेंटिलेटर बढ़ाए, लेकिन इन्हीं दिनों में शहर में 5647 संक्रमित मिल चुके हैं। पूरे मार्च में 7820 मरीज मिले थे। केंद्र सरकार ने 240 वेंटिलेटर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को भेजे हैं। यहां से जरूरत के मुताबिक जिला अस्पतालों को वेंटिलेटर भेजे जाएंगे।
 

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