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बड़ी सर्जरी की तैयारी में कांग्रेस अलाकमान, कमलनाथ की होगी छुट्टी? बदले जाएंगे महासचिव, हलचल तेज़

नई दिल्ली : आगामी विधानसभा चुनावों की लिस्ट में शामिल हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत तमाम अन्य राज्यों में संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस आलाकमान के स्तर पर नई रणनीति पर काम चल रहा है। 

कहा जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से कुछ राज्यों के महासचिव और सचिवों के अलावा प्रदेशाध्यक्षों को भी बदलने की तैयारी है। इसके लिए पार्टी में होमवर्क किया जा रहा है। 

सूत्रों के मुताबिक 10 से 15 फीसदी तक नए महासचिव बनाए जाएंगे, जबकि 20 से 25 फीसदी नए सचिव बनाए जाएंगे। माना जा रहा है कि अगले 15 दिन के अंदर बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। 

खबरों की मानें तो आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश के साथ साथ राजस्थान में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रहीं है। 

बात करें मध्यप्रदेश की तो साल 2018 में कमलनाथ के पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस की 15 साल बाद सत्ता में वापसी हुई थी, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया से टकराव करना कमलनाथ को भारी पड़ा। सिंधिया से टकराव के कारण मार्च 2020 में कमलनाथ को अपनी सरकार गंवानी पड़ी। अभी कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष तो है इसके साथ ही वो नेता प्रतिपक्ष की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

चर्चा है कि आने वाले दिनों में कमलनाथ के पास केवल एक ही जिम्मेदारी रह जाएगी। संगठन की जिम्मेदारी किसी नए व्यक्ति को दी जाएगी, ताकि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी में नया जोश भरा जा सके और कांग्रेस भाजपा से मुकाबला कर सके। 

वहीं, दूसरी तरफ अगर राजस्थान की बात करे तो यहां सीएम अशोक गेहलोत और सचिन पायलट के बीच टकराव किसी से छिपा नहीं है। पिछले तीन साल से दोनों गुटों के बीच अनबन लगातार जारी है। यदि अगले साल होने वाले चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस को वापसी करनी है तो इस टकराव को दूर करना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि पिछले दो दशक से अधिक समय से यहां हर पांच साल पर सरकार बदलने की परम्परा रही है। ऐसे में कांग्रेस यहां दोबारा सत्ता में आने के लिए क्या कदम उठा रही है, यह देखना दिलचस्प होगा।

गौरतलब है कि 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस संगठन में बड़े स्तर पर सर्जरी की तैयारी चल रही है। जमीन पर कांग्रेस को मजबूती देने की रणनीति तैयार की जा रही है। पुराने पदाधिकारियों को हटाया जाना तय माना जा रहा है। इसके लिए उनके कामकाज का मूल्यांकन किया जा रहा है।

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