उपचुनाव : क्या फिर होगा दल-बदल का खेल, बीजेपी और कांग्रेस को प्रदेश में उपचुनावों की चिंता
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मध्यप्रदेश/भोपाल(Bhopal) -: कोरोना(Corona) काल में भी मध्य प्रदेश(Madhyapradesh) में सियासत जारी है। राजनीतिक पार्टियां उपचुनाव(By Election) को लेकर एक दूसरे से दो-दो हाथ करने की तैयारी चालू कर दी है। अब बीजेपी और कांग्रेस को प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनावों की चिंता सता रही है और दोनों ही पार्टियां अंदर खाने इसकी तैयारियां में भी करने लगी हैं।
अब एक साइड बीजेपी उपचुनाव से पहले अपने संगठन को मजबूत करने में लगी है तो वहीं कांग्रेस साइलेंट तरीके बैठकें कर रही है। साथ ही कांग्रेस के नेता मंत्रिमंडल विस्तार पर भी नजर रखें हुए हैं।कांग्रेस को लग रहा है कि अगर मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो बीजेपी में जो लोग असंतोष होंगे वे खुलकर बाहर आएंगे और उसी का फायदा उठाना है।
बीजेपी को संगठन की चिंता
बीजेपी चुनावी तैयारियों से पहले अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद उन सभी विधानसभा क्षेत्रों में विस्तारकों की नियुक्ति की जहां उपचुनाव होने हैं। इन सब के बीच पार्टी की मुख्य चिंता उम्मीदवारों को लेकर है।
कांग्रेस छोड़कर सिंधिया के साथ बीजेपी में शामिल होने वाले 22 नेताओं को उनकी विधानसभा सीटों से टीकट दिया जाएगा लेकिन कहा जा रहा है कि पार्टी के इस फैसले से स्थानीय नेता नाराज हो सकते है। यही कारण है कि पार्टी समय रहते इन विवादों को सुलझा लेना चाहती है ताकि चुनावी मैदान में जाने से पहले किसी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े।
कांग्रेस कर रही इंतजार
काग्रेस साइलेंट मोड में है और बीजेपी की हर चाल पर ध्यान रख रही है। कांग्रेस को लग रहा है कि कैबिनेट विस्तार के बाद बीजेपी के कई नेता नाराज होंगे। इसके अलावे बीजेपी जब उपचुनावों के लिए उम्मीदवारों का एलान करेगी तो कई नेता खुलकर विरोध करेंगे, तब उसी का फायदा उठाना है।
सिंधिया पर सबकी नजर
उपचुनाव वाली अधिकांश सीटें ग्वालियर-चंबल संभाग की है। कहा जाता है कि इन क्षेत्रों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का ज्यादा प्रभाव है। यही कारण है कि दो दिन पहले बीजेपी की चुनावी बैठकों में सिंधिया को शामिल किया गया था। यही नहीं, सिंधिया लगातार कार्यकर्ताओं के संपर्क में है ताकि उपचुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार जीत सकें।




