देश का पहला पत्रकार भवन जमींदोज, इस तर्ज़ पर बनेगा नया मीडिया सेंटर।

भोपाल :- मालवीय नगर में आज देश का पहला पत्रकार भवन जमीं में समा गया। नगर निगम की 11 घण्टे की लम्बी कार्यवाही के बाद यह भवन गिरा दिया गया। भवन को गिराने का काम सोमवार सुबह 7 बजे से ही शुरू हो चुका था। चार जेसीबी और दो पोकलैंड मशीन भवन ध्वस्त करने के काम में लगी हुई थी। जैसा कि आप जानते है,तीन दिन पहले कोर्ट ने जिला प्रशासन को इस भवन को कब्जे में लेने के निर्देश जारी किए थे जिसके बाद दो दिन पहले प्रशासन द्वारा इस भवन में ताला लगा दिया गया था।
यह है पूरी कहानी
गौरतलब है कि भोपाल की वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन को तत्कालीन सरकार द्वारा 43 साल पहले 1969 में यह जमीन 30 साल की लीज पर दी गई थी, जिसकी अवधि 2015 में खत्म हो चुकी थी। इसके बाद भी पत्रकार संघ द्वारा वह भवन खाली नहीं करने पर मामला हाइकोर्ट में पहुँचा था। इस भवन को मध्यप्रदेश सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1959 के तहत 1970 में पंजीकृत किया गया था। इस भवन के नींव का उद्देश्य पत्रकारों के सामाजिक उत्थान के लिए किया गया था। निर्माण के कुछ साल बाद 1992 में इस संघ का नाम बदलकर श्रमजीवी पत्रकार संघ कर दिया गया था। 2015 में ही कोर्ट के आदेश पर जनसंपर्क अधिकारी भवन को कब्जे में लेने गए थे लेकिन तब हाइकोर्ट द्वारा इसपर स्टे आर्डर दे दिया गया था।
नगर निगम के 70 लाख बकाया
विदित हो कि पत्रकार भवन पर नगर निगम का 70 लाख रुपए बकाया है जिसकी वसूली होनी है। भवन के ध्वस्त होने के बाद इस वसूली पर संशय की स्थिति बनी हुई है। इसी मसले पर निगम ने वसूली को लेकर संघ के लोगों से चर्चा भी की थी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका था। चर्चा है कि अपनी वसूली को लेकर नगर निगम कोर्ट की शरण ले सकता है।
मीडिया सेंटर का निर्माण
प्रदेश सरकार द्वारा पत्रकार भवन की जमीन पर वर्ल्ड क्लास मीडिया सेंटर बनाने का प्रस्ताव पास किया गया है। इस मीडिया सेंटर में ऑडिटोरियम, बैंक्वेट हॉल के साथ साथ कॉन्फ्रेंस रूम एवं आर्ट गैलरी की भी व्यवस्था होगी।
पत्रकार संघ की आपत्ति
पत्रकार संघ द्वारा इस कार्यवाही पर आपत्ति भी जताई गई है। तत्कालीन पत्रकार भवन के कोषाध्यक्ष अशोक तरंगी ने उम्मीद जताई है कि मीडिया सेंटर के निर्माण से पत्रकारों के हितों का ध्यान रखा जाएगा और उनके उत्थान के लिए कार्य किये जाएंगे।

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