सरकार के 100 दिन पार, पर अभी तक नहीं हो सका फॉलन आउट अतिथि विद्वानों का उद्धार!

सरकार के 100 दिन पार, पर अभी तक नहीं हो सका फॉलन आउट अतिथि विद्वानों का उद्धार!
भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव :- मध्य प्रदेश में राजनीति चरम पर है… पर फॉलन आउट अतिथि विद्वानों की तरफ किसी का ध्यान नहीं है, बदलती राजनीति और सियासी घमासान के बीच 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. शिवराज सिंह चौहान जब मुख्यमंत्री पद पर नहीं थे उस दौरान उन्होंने फॉलन आउट अतिथि विद्वानों से वादा किया था कि उनकी सरकार आते ही सभी अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण होगा, पर मध्य प्रदेश में सरकार बदल गई कैबिनेट का विस्तार दो दो बार हो गया.. मंत्रियों को विभाग बांट दिए गए पर अभी तक फॉलन आउट अतिथि विद्वानों के हित में कोई भी फैसला नहीं लिया गया है.
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार के दौरान सड़क पर उतरने की बात कही थी.. जिसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए और कहा कि अब 2-2 टाइगर आ गए हैं…।।
पर दो टाइगर हो जाने के बाद भी अतिथि विद्वानों की स्थिति जस की तस है.
अतिथि विद्वान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया ने बताया कि शिवराज सिंह चौहान नरोत्तम मिश्रा इत्यादि जैसे बड़े मंत्रियों ने वादा किया था कि जल्द से जल्द अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण होगा..
हाल ही में नवनियुक्त उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री मोहन यादव ने कहा कि अगर शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वादा किया है हमारी सरकार में वह सभी वादे पूरे होंगे.. पर अभी तक कोई भी वादे पूरे नहीं हुए.. अतिथि विद्वान लगातार गुहार लगा रहे हैं कि फॉलन आउट,अतिथि विद्वानों को नियुक्त किया जाए… ताकि उनकी रोजी-रोटी इस महामारी के दौरान चल सके.. डॉक्टर भदौरिया ने बताया कि उनके पांच अतिथि विद्वान साथी आर्थिक स्थिति से जूझते जूझते हार गये और फिर अपने आप को मौत के मुंह में धकेल दिया..
करीब 1150 अतिथि विद्वानों की चॉइस फिलिंग कराई गई थी, जिसका भी अभी तक कोई रिजल्ट नहीं आया है और अगर रिजल्ट आ भी जाता है तो फिर भी करीब 700 से 800 अतिथि विद्वान बेरोजगार रह जाएंगे..
इसीलिए सरकार से हम लगातार विनती कर रहे हैं कि हमारा नियमितीकरण कराया जाए…
ताकि अब कोई और साथी आत्महत्या करने को मजबूर ना हो..

अब देखना यह होगा कि आखिर कितने दिनों में फॉलन आउट अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण होता है.



