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सावधान! अब जबलपुर में भी हो चुकी है ब्लैक फंगस की एंट्री,

सावधान! अब जबलपुर में भी हो चुकी है ब्लैक फंगस की एंट्री,

 

 मध्यप्रदेश के इंदौर और भोपाल में ब्लैक फंगस में कदम रखे लिए थे कि अब जबलपुर में भी ब्लैक फंगस की एंट्री हो चुकी है.

यहां भी ब्लैक फंगस के मामलों की पुष्टि हुई है. मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग द्वारा कोरोना से ठीक हो चुके कुछ मरीजों में इसके लक्षण देखे गए हैं. इससे एक मरीज की मौत भी हो गई है. डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी कोरोना काल के पहले भी थी.

 डॉक्टरों के अनुसार जब मरीज का कोरोना इलाज किया जाता है उस वक्त स्टेरॉयड के ज्यादा इस्तेमाल से शुगर का लेवल बढ़ जाता है. जिसकी वजह से ब्लैक फंगल इंफेक्शन के चांसेस होते हैं.

 ज्यादातर ब्लैक फंगस की चपेट में वह लोग आते हैं जो लंबे समय से डायबिटीज के पेशेंट हो और एस्टेरॉइड लेते रहे हैं.

डॉक्टर के मुताबिक ये फंगस एक मरीज से दूसरे मरीज में नहीं फैलता, लेकिन ये कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिमाग में इसके पहुंचने पर मरीज की मौत होने के चांस 70 से 80 फीसदी तक हैं.

 ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षण:-

 इंफेक्शन के शुरुआती लक्षण आंख और नाक से शुरू होते हैं. और फिर दिमाग तक पहुंचते हैं.

अगर इसे शुरुआत में ही डिटेक्ट कर लिया जाए, तो मरीज ठीक हो सकता है. जिले के CMHO के अनुसार मरीजों को इससे बचाने के सभी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं.

ब्लैक फंगस से खुद को कैसे बचाएं :-

फंगस कम ऑक्सीजन में पनपता है. इसलिए नाक से सांस लें.

अपनी बॉडी में शुगर लेवल मेंटेन रखें.

एंटीसेप्टिक जैसे बीटाडीन का सॉल्यूशन बनाकर दो-तीन बूंद नाक में डालते रहें. यह अंदर फंगस के फैलाव को रोक देता है.

शुगर बढ़ रही है तो मॉनिटरिंग करके कंट्रोल करें.

आंख में सूजन हो या दर्द हो तो सलाह लें

साइनस में एयर रहती है.

फंगस से पस आ जाता है.

म्यूकर फास्ट स्प्रेडिंग फंगस है.

शरीर में साइनस के ऊपर ऑर्बिट होता है.उसके अंदर आई-बॉल होती है.

म्यूकर फैलने के कारण मरीजों की आंख में सूजन तेज दर्द होता है.

आंखों के नीचे वाला हिस्सा जिसे चीक कहते हैं उसमें दर्द शुरू होता है तो इसे गंभीरता से लें.

सेनसेशन आंखों के मूवमेंट में भी फर्क पड़ता है.

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