भोपाल : रिकॉर्ड 41 मौतें, 8 माह की मासूम भी शामिल, जगहें पड़ गई कम, लेकिन सरकारी आकड़ो में केवल 2 मौतें, ऐसा क्यों??

मध्यप्रदेश/भोपाल : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना संक्रमित मरीज़ो के आकड़ो के साथ साथ मौत का आकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा हैं। गुरुवार को केवल भोपाल में ही 41 कोरोना मरीजों का अंतिम संस्कार हुआ। बता दे कि प्रदेश में एक दिन में किसी एक शहर में कोविड मरीजों के शवों के अंतिम संस्कार का सबसे बड़ा आंकड़ा हैं। वहीं, दूसरी तरफ अगर सरकारी आकड़ो पर अगर नज़र डालें तो भोपाल में गुरुवार को 2 मौतें दिखाई गई हैं। जबकि पुरे प्रदेश में 27 मौतें बताई गई हैं। जिसके बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

गुरुवार को भदभदा विश्राम घाट पर 36 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। इसमें कोरोना संक्रमित 31 शवों का प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया। 13 शव भोपाल के और 18 बाहर के थे। 36 शवों के बाद भी विश्रामघाट में 8 परिवार शव लाने के लिए फोन कर रहे थे, जिन्हें रात हो जाने के कारण अगले दिन आने को समझाया गया। वहीं सुभाष नगर विश्राम घाट में 5 का दाह संस्कार हुआ और झदा कब्रिस्तान में भी 5 संक्रमित शवों को दफनाया गया है।
हालात तो ऐसे हो गए कि पहली बार भदभदा विश्रामघाट पर कोरोना संक्रमितों के लिए तय की गई जगह छोटी पड़ गई और नई जगह तैयार करना पड़ी। भदभदा विश्राम घाट में कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार के लिए कुल 12 पिलर तय किए गए हैं। वहां गुरुवार को जब शव जलाने की जगह नहीं बची तो विद्युत शवदाह के ग्राउंड में नई जगह तैयार करनी पड़ी। भदभदा विश्रामघाट के अध्यक्ष अरुण चौधरी के मुताबिक इतनी बड़ी संख्या में पहली बार अंतिम संस्कार किया गया हैं।
जबकि, सुभाष नगर विश्राम घाट के ट्रस्ट प्रबंधक शोभराज सुखवानी के मुताबिक वहां 5 संक्रमित मृतकों का दाह संस्कार किया, इसमें चार मृतक भोपाल के थे और एक होशंगाबाद का।
8 महीने की मासूम बच्ची की भी मौत
भोपाल में गुरुवार को आठ महीने की अदीबा भी दुनिया को अलविदा कह गई। भोपाल में कोरोना से ये सबसे कम उम्र के मरीज की मौत हैं। अदीबा के अब्बा मासूम शरीर ने बताया कि उसे कोरोना हुआ था। एम्स में 12 दिन संघर्ष के बाद अदीबा वायरस से हार गई। परिवार के मुताबिक उसे बुखार था और शरीर में झटके लग रहे थे, इसलिए 27 मार्च को एम्स ले गए। हैरानी ये कि घर में और कोई संक्रमित नहीं था। अदीबा के अब्बा मासूम शरीर झदा कब्रिस्तान में अपनी बच्ची का दफन करने पहुंचे। वो परिवार की इकलौती बच्ची थी।




