भोपाल : कोरोना की दूसरी लहर में 971 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत, अब मुआवजे के लिए भटक रहे परिजन, छलका दर्द

- 400 के परिजनों ने मुआवजे के लिए आवेदन कराया जमा
- परिजनों ने बयां किया अपना दर्द, बताई हक़ीक़त
- मुआवजा कब मिलेगा किसी को पता नहीं
भोपाल : कोरोना की दूसरी लहर में केवल राजधानी भोपाल में ही 971 से ज्यादा लोगों की जान चले गई। अब इनके परिजन मुआवजे की आस में सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि कलेक्टोरेट की आवक-जावक शाखा में आवेदन स्वीकार तो हो रहे हैं, लेकिन मुआवजा कब मिलेगा इसकी जानकारी किसी को नहीं है। बता दे कि ये मौत के आकड़े भोपाल जिले में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक है। अब इसमें से 400 के परिजनों ने मुआवजे के लिए आवेदन जमा कराए हैं।
लोगों का छलका दर्द
अयाेध्या नगर निवासी शकुन बाई ने बताया कि 80 साल के पति परम सिंह को सांस लेने में तकलीफ हुई तो कस्तूरबा अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां से निजी अस्पताल जाने को कहा। 30 मार्च को उनकी मौत हो गई, लेकिन रिपोर्ट 31 मार्च को आई। 72 साल की उम्र में मैंने मुआवजे के लिए वार्ड, जोन और नगर निगम के चक्कर लगाए। अब कलेक्टोरेट आवेदन जमा किया है।
ऐसे ही कोलार निवासी वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि अप्रैल में 22 साल के बेटे आदित्य शर्मा के इलाज के लिए तीन अस्पतालों के चक्कर लगाए। अंत में चिरायु अस्पताल में 30 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। मुआवजे का पता करने पर तीन दिन तक भटकता रहा। बाद में कलेक्टोरेट की आवक-जावक शाखा में फाॅर्म जमा हो गया है। लेकिन वहां बताया गया है कि अभी कोई गाइडलाइन नहीं आई है।
वहीं, अनवरी खान नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि मेरे पति अब्दुल सईद (49) ड्राइवर थे। 15 मार्च के बाद सांस लेने में तकलीफ हुई। इलाज के लिए रुपए नहीं थे। जिस अस्पताल में गए, वहां लाखों रुपए मांगे। 19 मार्च को उनकी मौत हो गई। इलाज में करीब 6 लाख का कर्ज हो गया। जेवर गिरवी रखकर कुछ कर्ज पटाया है। अभी भी लाखों रुपए देना बाकी हैं। मुआवजा मिल जाए तो थोड़ी मदद मिल जाएगी।
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