सभी खबरें

बेकाबू कोरोना काल में अतिथि विद्वानों का जीवन संकट में, अब तक नहीं हुई सेवा में बहाली 

बेकाबू कोरोना काल में अतिथि विद्वानों का जीवन संकट में, अब तक नहीं हुई सेवा में बहाली 

' कोरोना संक्रमण से मौत होने पर राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मानदेय पर कार्य करने वाले को भी 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का प्रावधान है '

भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:-प्रदेश में बेकाबू कोरोना की दूसरी लहर में 3600 से अधिक अतिथि विद्वान सरकारी महाविद्यालयों में बिना आर्थिक सुरक्षा के सेवा दे रहे हैं। जिससे इनके जीवन और भविष्य के साथ इनके परिवार का भी जीवन संकट में है। प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों का कोरोना संक्रमण से मौत होने पर तो 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का प्रावधान है, परंतु वर्षो से मानदेय पर कार्य करने वाले अतिथि विद्वानों के लिए इस प्रकार का कोई प्रावधान शिवराज सरकार ने नहीं किया है। जबकि यह हर दिन महाविद्यालय में विद्यार्थियों से अध्यापन कार्य, सीसीई, प्रोजेक्ट, परीक्षा फॉर्म, आवास एवं छात्रवृत्ति आदि के आवेदनों को लेने के लिए संपर्क में रहते हैं। एमपीपीएससी से हुई नियमित भर्ती की नियुक्ति के कारण अतिथि विद्वानों को दूरदराज के महाविद्यालयों में नियुक्ति दी गई है। जिससे उन्हे सरकारी छुट्टियों के दौरान अपने परिवार से मिलने के लिए भी बसों में आवागमन करना पड़ता है।

वहीं पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के समान ही अस्थायी, संविदा, मानदेय आदि पर कार्य करने वाले के लिए भी कोरोना संक्रमण से मौत होने पर 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया है।

 दूसरी ओर कोरोना महामारी की पहली लहर से पहले नियमित भर्ती की नियुक्ति के कारण फाॅलेन आउट होकर बेरोजगार बैठे 500 से अधिक अतिथि विद्वानों को भी शिवराज सरकार ने व्यवस्था में नहीं लिया है। जिसके कारण उनका परिवार बेहद आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। जब वर्तमान शिवराज सरकार पूर्व कमलनाथ सरकार के दौरान विपक्ष में थी, उस समय अतिथि विद्वानों का आंदोलन सेवा बहाली और नियमितीकरण के लिए भोपाल के शाहजहांनी पार्क में चल रहा था। तब वर्तमान सीएम शिवराज सिंह चौहान और उनके कई मंत्री, विधायक, सिपहसालार आदि ने इनका पूरजोर पक्ष लिया था और कहते थे कि, हमें सत्ता प्राप्त होने पर हम अतिथि विद्वानों को सेवा में भी लेंगे और उनका नियमितीकरण भी किया जाएगा। परंतु अब इनकी ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

 प्रदेश के ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी महाविद्यालयों तक और कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार से वर्तमान भाजपा की शिवराज सरकार तक अतिथि विद्वान सेवा देते आ रहे हैं। फिर भी इनका भला नहीं हुआ है। वर्तमान में इनकी संख्या फाॅलेन आउट और कार्यरत को मिलाकर 4200 से भी ज्यादा है। नियमित भर्ती में इनको 5 प्रतिशत बोनस अंक देकर ठग लिया था। जिसमें बहुत ही कम लोग चयनित हुए थे। लेकिन अब यह नौकरी की उम्र की सीमाओं को लांघते जा रहे हैं। सरकार को अब इन पर ध्यान आकर्षण करने की आवश्यकता है।

 अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी ने इस बारे में बताया है कि, कार्यरत और फाॅलेन आउट अतिथि विद्वानों का भविष्य तो वैसे भी सरकार ने वर्षो से कोरोना संक्रमण से भी ज्यादा अंधेरे में कर रखा है। लेकिन अब अन्य राज्यो से प्रेरणा लेकर इस कोरोना जैसी महामारी में तो कम से कम हमारा और हमारे परिवार का भविष्य सुरक्षित कर देना चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button