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सरकार की लापरवाही से सबसे अधिक तिरस्कृत हुए हैं उच्च शिक्षित अतिथि विद्वान, कब होगी बहाली 

सरकार की लापरवाही से सबसे अधिक तिरस्कृत हुए हैं उच्च शिक्षित अतिथि विद्वान, कब होगी बहाली?

सहायक प्राध्यापक भर्ती 2017 अब तक कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चर्चा का विषय रही है '

भोपाल :-सरकार की लापरवाही और शोषणकारी नीति के कारण प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों के उच्च शिक्षित अतिथि विद्वान अपने भविष्य और रोजगार से सबसे अधिक तिरस्कृत हुए हैं। वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र में इनके लिए पक्ष और विपक्ष दोनों की तरफ से प्रश्न तो लगाए जाते है। लेकिन उनका जवाब प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव के द्वारा केवल नहीं में ही दिया जाता है। जबकि कमलनाथ सरकार में भाजपा जब विपक्ष में थी तो उस समय सड़क से लेकर सदन तक इनके नियमितीकरण और सेवा बहाली के लिए कमलनाथ सरकार पर दबाव बनाया गया था। इस तरह अतिथि विद्वान राजनीतिक मोहरा बनते जा रहे हैं। जिससे कई योग्य अतिथि विद्वानों की मौत हो चुकी है। अनेकों मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी के कारण दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
 इतना ही नहीं 1 अप्रैल से ट्रांसफर प्रक्रिया आरंभ होगी। जिसमें कई नव चयनितो ने परिवीक्षा अवधि में ही ट्रांसफर की अर्जी लगा रखी है। जिसका प्रभाव एक बार फिर अतिथि विद्वानों पर फाॅलेन आउट नामक जहर के रूप में पडे़गा। जबकि 600 लोग दिसंबर 2019 से नियमित नियमित से चयनितो की नियुक्ति होने के कारण फाॅलेन आउट होकर बेरोजगार बैठे हैं।  अगर देखा जाए तो अधिकतर अतिथि विद्वान सन 2002 या उससे पूर्व से लगातार काम करते आ रहे हैं। फिर इनको अब तक वास्तविक हक नहीं मिल पाया है। 
वहीं सहायक प्राध्यापक भर्ती 2017, ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी की नियमित भर्ती कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चर्चा का विषय रही है। भाजपा सरकार ने इसकी भर्ती को अंजाम दिया था तो इसकी नियुक्ति देने में जल्दबाजी कांग्रेस सरकार ने दिखाई थी। यह भर्ती  वस्तुनिष्ठ आधारित थी, जिसमें 200 प्रश्न 400 अंकों के दिए गए थे। अतिथि विद्वानों को केवल 5 प्रतिशत का अधिभार उनके 5 वर्ष अनुभव के इसमें दिए थे, जिसका खामियाजा वह अब तक भोग रहे हैं। इसमें अब तक 32 संशोधन, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लगना, उम्मीदवारों द्वारा फर्जी दस्तावेज लगाना, फर्जी तरीके से अनुभव अर्जित करना, एक ही समय में पीएचडी कोर्स वर्क और अतिथि अध्यापन कार्य करना आदि बातों को अधिकारियों की कारगुजारी और रसूखदारो के प्रभाव के कारण दबा दिया गया था। जून-जुलाई 2018 में इसकी परीक्षा पीएससी के माध्यम से हुई थी, जिसका परिणाम और नियुक्तियां सन 2019 में हुई थी। परंतु सुप्रीम कोर्ट से दिव्यांग आरक्षण के निर्णय के बाद एक बार फिर पुनरीक्षित सूचियां पीएससी से जारी की जा रही है। जिसके कारण कई कार्यरत अतिथि विद्वानों को फाॅलेन आउट होना पड़ेगा।
 इन सभी परेशानियों के कारण अतिथि विद्वान एक बार फिर शाहजहांनी पार्क भोपाल में दिसंबर 2019 से मार्च 2020 तक चले आंदोलन की तर्ज पर पुनः आंदोलन करने की रूपरेखा बना रहे हैं।
अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष  का इस बारे में कहना है कि, ' शिवराज सरकार से हम निवेदन करते हैं कि वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र में ही चर्चा करके अतिथि विद्वानों के भविष्य को संवारने का निर्णय लेने की कृपा करें, अन्यथा अप्रैल माह से एक बार फिर शाहजहांनी पार्क की तर्ज पर आंदोलन देखने को मिलेगा। '
 संघर्ष मोर्चा के ही मीडिया प्रभारी ने इस बारे में बताया है कि, ”  अतिथि विद्वानों की उम्र, सेवा कार्य और उनके अनिश्चित भविष्य को देखते हुए शिवराज सरकार को शीघ्र ही उचित निर्णय ले लेना चाहिए। क्योंकि हमने वर्षों से अल्प मानदेय में ही जीवन गुजारा है। “

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