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क्या दो "टाइगरों" की जुगलबंदी करा पाएगी फॉलन आउट अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण?

भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:- एक तरफ जहां मध्य प्रदेश की राजनीति चरम पर है तो वहीं दूसरी तरफ फॉलन आउट अतिथि विद्वानों की स्थिति बेहद दयनीय होती जा रही है…. ज्योतिरादित्य सिंधिया जब कांग्रेस में थे तो उन्होंने कहा था कि अगर सरकार फॉलन आउट अतिथि विद्वानों का जल्द से जल्द नियमितीकरण नहीं करती है तो वह उनके साथ सड़क पर उतरेंगे… 
 पर अब ऐसा लगता है कि सिंधिया के भी दावे धरे के धरे रह गए हैं… क्योंकि फॉलन आउट अतिथि विद्वानों की स्थिति रोड पर आने बराबर हो गई है.. शिवराज सिंह चौहान जब सत्ता में नहीं थे तो उन्होंने कहा था कि सभी फॉलन आउट अतिथि विद्वानों का जल्द से जल्द नियमितीकरण होगा क्योंकि “टाइगर अभी जिंदा है”.. 
 तो वही कल ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने भी कहा कि अब एक टाइगर नहीं दो-दो टाइगर आ गए हैं… 
 पर दो टाइगर आ जाने के बाद भी अतिथि विद्वानों के स्थिति जस की तस है… 
 अतिथि विद्वान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सुरजीत सिंह भदौरिया ने कल पत्र के माध्यम से ज्योतिरादित्य सिंधिया को ज्ञापन सौंपा जिसमें उन्होंने तीन मांगे की. 

अतिथि विद्वानों की तीन प्रमुख मांगे:- 
1- सभी फॉलन आउट अतिथि विद्वानों को व्यवस्था में वापस लिया जाए

2- सभी यूजीसी योग्यता पूर्ण करने वाले अतिथि विद्वानों को नियमित किया जाए

3- बिना UGC योग्यता पूर्ण करने वाले अतिथि विद्वानों को संविदा नियुक्ति एवं यूजीसी वेतनमान देकर कम से कम 4 वर्ष योग्यता पूर्ण करने का अवसर दिया जाए. एवं योग्यता पूर्ण करने के तारीख से ही उन्हें नियमित माना जाए.

 अब देखना यह होगा कि दोनों “टाइगर” सिर्फ जुमले वाले हैं या अपने दिए जुमले को पूरा करेंगे……
 फॉलन आउट अतिथि विद्वान निरंतर  आशा लगाए बैठे हैं.

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