अटल बिहारी वाजपेयी: जन्मदिन पर पढिए अटल से अटल जी बनने तक का सफर

अटल बिहारी वाजपेयी: जन्मदिन पर पढिए अटल से अटल जी बनने तक का सफर

अटल बिहारी वाजपेयी: जन्मदिन पर पढिए अटल से अटल जी बनने तक का सफर

-राजकमल पांडे

अटल बिहारी वाजपेयी ‘‘25 दिसंबर 1924 - 16 अगस्त 2018’’ भारत के तीन बार के प्रधानमंत्री थे। अटल जी पहले 16 मई से 1 जून 1996 तक, तथा फिर 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी थे। मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे। वे ब्रजभाषा और खड़ी बोली में काव्य रचना करते थे। चार दशकों से भारतीय संसद के सदस्य थे, लोकसभा, निचले सदन, दस बार, और दो बार राज्य सभा, ऊपरी सदन में चुने गए थे। उन्होंने लखनऊ के लिए संसद सदस्य के रूप में कार्य किया, 2009 तक उत्तर प्रदेश जब स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण सक्रिय राजनीति से सेवानिवृत्त हुए। अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारंभ करने वाले वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमंत्री पद के 5 वर्ष बिना किसी समस्या के पूरे किए। आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेने के कारण इन्हे भीष्मपितामह भी कहा जाता है। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मंत्री थे।

2005 से वे राजनीति से संन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली में 6-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे. 16 अगस्त 2018 को एक लंबी बीमारी के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में श्री वाजपेयी का निधन हो गया। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे

देष के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का आज 96 वां जन्मदिन है. पूरा देश आज अटल बिहारी वाजपेयी जी के गाये हुए गीत पर झूम रहा है ‘‘मै गीत नहीं गाता हूं’’ व अन्य कविताएं जो सभी भारतीय के लिए प्रेरणा दायक हैं. भारत के प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री अमित शाह सहित कई नेताओं ने आज अटल जी को याद किया. अटल जी का जब भी नाम लिया जाता है तो उन्हें बडे सम्मान से याद किया जाता है. क्योंकि भारतीय राजनीति में एक अटल जी ही जिन्होंने अपने राजनीतिक कार्यकाल में बेदाग रहे हैं. अटल जी भारतीय राजनीति के ऐसे शीर्ष पर विराजमान थे कि विपक्ष भी उन्हें झुक कर प्रणाम करता था.

देश में इंफ्रांस्ट्रक्चर विकास की जरूरत को अटल जी ने काफी पहले ही समझ लिया था यही वजह रही कि जब उनकी सरकार आई तो महत्वाकांक्षी स्वर्णिम चतुर्भुज योजना की शुरूआत की इस योजना के तहत अटल जी ने देश के चार बडे महानगरों चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुम्बई को सड़क मार्ग से जोडने की योजना बनायी औद्योगिक विकास को गति देने के लिए यह योजना क्रांतिकारी योजना साबित हुई.

पोखरण में परमाणु परीक्षण

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में ही मई 1998 को पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया। इस परमाणु परीक्षण के साथ ही देष परमाणु शक्ति संपन्न देशो में शुमार हो गया. हालांकि सरकार पर इस परीक्षण को ना करने का काफी दबाव था इसके बावजूद अटल जी की सरकार ने परीक्षण करने का साहसिक फैसला किया. इस परीक्षण के लिए देश का कई प्रतिबंधों से गुजरना पड़ा.

जब बेहद डरी हुई थीं इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी सीधे घर ही पहुंच गए

1977 में विदेश मंत्री बनने के बाद वाजपेयी ने पहला काम यह किया कि वह इंदिरा गांधी के घर यह आश्वासन देने पहुंचे कि सरकार बदले की कार्रवाई नहीं करेगी। श्रीमती गांधी और उनका परिवार इस बात को लेकर चिंतित था कि कहीं गुस्साई भीड़ उनकी पीट-पीटकर हत्या न कर दे। श्रीमती गांधी के घर जाने से पहले उन्होंने देसाई से अनुमति ले ली थी। हालांकि देसाई काफी समझाने-बुझाने के बाद माने थे। वाजपेयी ने श्रीमती गांधी से कहा कि उनके साथ उचित व्यवहार होगा और सत्ताधारी दल का कोई भी नेता उनके या उनके परिवार के खिलाफ हिंसा नहीं भड़काएगा।

दरअसल, उनके खिलाफ लोग इतना भड़के हुए थे कि हल्का सा उकसावा भी अराजकता का रूप ले सकता था जिसमें लोग कानून को अपने हाथ में ले लेते। अकेले दिल्ली में ही इमरजेंसी के दौरान 20,000 से ज्यादा लोगों पर जुल्म ढाए गए थे। वाजपेयी का आश्वासन सिर्फ कहने भर को नहीं था, यह एक वादा था। अटल जयंती पर वरिष्ठ पत्रकार उल्लेख एनपी की पुस्तक ‘द अनटोल्ड वाजपेयी’ से कुछ ऐसे ही किस्‍से हम आपको बताते हैं।

वाजपेयी कहा करते थे कि संसद में वह भले ही इंदिरा गांधी के सबसे कट्टर आलोचकों में से एक थे, लेकिन उनके व्यक्तिगत संबंध अटूट थे। उनकी मृत्यु के बाद उन्होंने कहा था, ‘मैं जब भी श्रीमती गांधी से मिला, मुझे लगा जैसे वह किसी अज्ञात भय की गिरफ्त में हैं। उनके दिमाग के किसी कोने में असुरक्षा की एक गहरी भावना थी। हर किसी पर नजर रखना, कुछ भी खुलकर न कहना, यह सोचना कि सारी दुनिया उनके खिलाफ कुचक्र रच रही है। ये सारी बातें बताती हैं कि हम यदि इंदिराजी के व्यक्तित्व और कार्यों को पूरी तरह समझना चाहते हैं तो इस मनोवृत्ति का विश्लेषण गहराई से करना होगा।’

अटल बिहारी वाजपेयी के कुछ चुनिन्दा कविता

अटल बिहारी बाजपेयी की गीत नया गाता हूं, शीर्षक से लिखी कविता सोच को बदलने की ताकत रखती है, ये कविता दो भागों में लिखी गई. यहां पढ़ें पूरी कविता...

 

‘‘पहली अनुभूति’’

बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं

टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं

गीत नहीं गाता हूं

 

लगी कुछ ऐसी नजर बिखरा शीशे सा शहर

अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं

गीत नहीं गाता हूं

 

पीठ मे छुरी सा चांद, राहू गया रेखा फांद

मुक्ति के क्षणों में बार बार बंध जाता हूं

गीत नहीं गाता हूं

 

‘‘दूसरी अनुभूति’’

 

टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर

पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर

झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात

प्राची मे अरुणिम की रेख देख पाता हूं

गीत नया गाता हूं

 

टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी

अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी

हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,

काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं

गीत नया गाता हूं