Delhi Elections : दिल्ली में हो रहे ध्रुवीकरण के प्रयोगों के बीच, अशोक कुमार पांडेय की कलम चली तो केजरीवाल और उनकी पार्टी को भी समेट दिया, पढ़ें पूरा लेख।

कलमकार अशोक कुमार पांडेय “कश्मीरी नामा” और “कश्मीर और कश्मीरी पंडित” जैसे पुस्तक के लेखक हैं।
ईमानदारी से कहूँ तो मुझे इस बात से कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर कपिल गुर्जर आप का कार्यकर्ता निकल जाए। सेंटर में भाजपा दिल्ली में आप जैसा नारा बाक़ायदा आप के बड़े लीडरान ने प्रमोट किया है। यही वजह थी कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन नही किया गया। आप के काडर और लीडरशिप में भरे पड़े हैं संघी। ऐसे ही नहीं कपिल मिश्रा को वहाँ संस्कृति मंत्रालय दिया गया था, कुमार विश्वास महत्त्वपूर्ण नेता थे और जनरल साहब से लेकर किरण बेदी जी उस आंदोलन में शामिल। योगेन्द्र यादव से लेकर प्रशांत भूषण को बाहर का रास्ता ऐसे ही नहीं दिखा दिया गया।

आप ने मीडिया मैनेजमेंट और ट्रोल आर्मी निर्माण भाजपा से सीखा है। ईमानदारी की बात है कि आप ने कुछ लोक लुभावना सब्सिडी के अलावा किया कुछ नहीं है। ट्रैफ़िक व्यवस्था बद से बदतर होती चली गई है। बसों की हालत ख़राब है। न नई बसें आईं न ब्रिज बने न स्कूल। भ्रष्टाचार से भी कोई मुक्ति नहीं मिली। हाँ जो किया गया स्कूल और अस्पतालों में उसका भयानक प्रचार किया गया। विज्ञापन के मामले में मोदी जी और केजरीवाल जी का मुक़ाबला बराबर का है। रहा सवाल विकास का तो अगर मीडिया को एक ओर रखकर शीला दीक्षित के समय के काम से तुलना कर ली जाए तो बहुत कुछ साफ़ हो जाएगा। बाक़ी लोगों की स्मृति कम होती है, मीडिया का प्रचार उसको ढँक चुका है। और हाँ, दिल्ली का चुनाव हमेशा विकास के मुद्दे पर लड़ा गया है। आप ने अपनी सुविधा से भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया था, सब चोर हैं जी का नारा दिया और सबको जेल भेज रहे थे। सत्ता आकर भूल गए।
ऐसे ही कार्यकर्ताओं को लेकर आप की कोई नीति नहीं। मुस्लिम वोट भाजपा को हराने के लिए मिल ही जाएगा तो सारा ज़ोर है मध्यवर्ग और रेडिकल हो चले निम्न मध्यम वर्ग को ख़ुश रखने पर। याद कीजिए 370 हटने के बाद सबसे पहले स्वागत करने वाले केजरीवाल थे। शाहीन बाग़ पर उनके बयान ग़ौर से देखें तो वह मिडल क्लास हिन्दू को ही सम्बोधित हैं।
सम्भव है आप चुनाव जीत जाए। सम्भव है भाजपा ही जीत जाए अंततः। लेकिन आप से कोई सेक्यूलर उम्मीद बेकार है। वह धीरे धीरे भाजपा के लिए रास्ता बना रही है। आख़िरी में वही होगा। इस चुनाव में न सही, आगे सही।
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