CM शिवराज से बोले अजय विश्नोई, आप अगर सच नहीं सुनना चाहते, तो मैं चुप हो जाता हूं…लेकिन सच्चाई क्यों छिपाई जा रही हैं?

मध्यप्रदेश/जबलपुर – जबलपुर से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने एक बार फिर अपनी ही सरकार को आड़े हाथों लिया। दरअसल, आज सीएम शिवराज ने कोरोना के हालात को देखते हुए सभी जिलों की क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रप की बैठक बुलाई थी। जिसमे अजय विश्नोई भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को कोरोना से 14 मरीजों की मौत हुई। जिसकी सूची मेरे पास है, लेकिन प्रशासन सिर्फ 2 माैतें बता रहा हैं। यह सच्चाई क्यों छिपाई जा रही हैं?
अजय विश्नोई ने जबलपुर के चौहानी श्मशान घाट का उल्लेख करते हुए कहा कि शुक्रवार को वहां 14 अंतिम संस्कार हुए जबकि प्रशासन मीडिया में यह जानकारी दे रहा है कि केवल दो लोगों की मौत हुई। उन्होंने प्रशासन से कहा कि यदि आप सच्चाई बताओगे तो लोग डरेंगे और कोरोना से बचने के सभी उपाय करेंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मेरे विधानसभा के मझौली क्षेत्र में एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो गई और उससे डर के वहां के लोग मास्क पहनने लगे। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि वे सच्चाई से लोगों को रूबरू कराएं।
बता दे कि अजय विश्नोई यहीं नहीं रुके। उन्होंने प्रशासन की नाकामी के उदाहरण देना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशसन एक बेरोमीटर लेकर चल रहा हैं। मरीज RT-PCR टेस्ट की जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही रैपिड एंटीजन टेस्ट करा कर इलाज शुरू कर देता हैं। इस कारण प्राइवेट अस्पताल में बेड की मारामारी हो रही हैं। प्रशासन सही आंकड़े नहीं बता रहा। इस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें टोका- अजय, सभी जिलों के साथ बात करना हैं। ऐसे में जरूरी सुझाव हों तो दें। इस पर विश्नोई ने कहा- यदि आप सच नहीं सुनना चाहते, तो मैं चुप हो जाता हूं।
मालूम हो कि बीजेपी विधायक अजय विश्नोई शिवराज सरकार में पहले स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं और स्वास्थ्य महकमे की अच्छी खासी जानकारी रखते हैं। वहीं, ये पहला मौका नही है जब उन्होंने अपनी सरकार का घेराव किया हो। इस से पहले भी वो कोई बार अपनी सरकार के खिलाफ मुखर हुए हैं। लेकिन इस बार मामला थोड़ा गंभीर हैं। क्योंकि कोरोना वाकई बेकाबू होता जा रहा हैं। जिसके कारण कई लोग मर चुके हैं। इस से पहले राजधानी भोपाल में भी शुक्रवार को रिकॉर्ड 41 मौते हुई लेकिन सरकार रिकॉर्ड में सिर्फ 2 मौतें दर्ज थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई सरकार मौत के आंकड़ों को छुपा रहीं हैं?




