आखिर ऐसा भेदभाव क्यों कर रहीं "शिव राज सरकार"?? कर्मचारियों की 30% सेलरी काट भर रही अपना खज़ाना!!

भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – सत्ता में आने के बाद प्रदेश की शिवराज सरकार ने कोरोना संकट (Corona Crisis) का हवाला देते हुए सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 30 प्रतिशत की कटौती का फैसला लिया।
सरकार ने एक आदेश जारी कर नान पीएससी यानी विभागाध्यक्षों द्वारा की जाने वाली भर्तियों में सेलरी कट का फार्मूला लगा दिया हैं। इसमें नई भर्ती वाले कर्मचारियों को पहले साल में 70 फीसदी, दूसरे साल में 80 फीसदी, तीसरे साल में 90 फीसदी और चौथे साल में 100 फीसदी यानी पूरा वेतन मिल पाएगा। इसमें प्रत्येक कर्मचारी को तीन साल में 2.50 लाख रुपए का नुकसान होगा।
इसी के तहत 2020 फरवरी के बाद भर्ती हुए 5000 कर्मचारियों की 30 फीसदी सेलरी कट सरकार ने 500 करोड़ की बचत की हैं। बता दे कि इस साल प्रदेश में सीधी भर्ती और अनुकंपा से भर्ती हुए 5000 तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वेतन से फरवरी से नवंबर के बीच 500 करोड़ रुपए बचा लिए हैं। लेकिन पीएसी (PSC) और एमपीपीएससी (MPPSC) के कर्मचारियों को पूरा भुगतान किया गया हैं। जिसके चलते कर्मचारियों को आक्रोश और नाराजगी हैं।
अखिल भारतीय सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की नई भर्तियों को इससे बाहर रखा गया है और प्रोबेशनरी पीरिएड में भी 100 फीसदी भुगतान किया गया।
राज्य सरकार के इस दोहरे रवैए के कारण कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि आखिर उनके साथ ही ऐसा क्यों? सरकार को अखिल भारतीय सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवा से भर्ती होने वाले अफसरों पर भी कर्मचारियों का फार्मूला लागू होना चाहिए।
नए कर्मचारियों के मामले में अगले दो साल में इसी तरह सेलरी कट कर 1000 करोड़ रुपए बचाए जाने की योजना हैं। सरकार के इस फैसले से नई भर्ती से आए कर्मचारियों में नाराजगी हैं। इस से पहले कोरोना के चलते केंद्र के बाद राज्य सरकार कर्मचारियों का जुलाई 2021 तक पहले से ही कर्मचारियों का डीए पर रोक लगा चुकी हैं। इससे कर्मचारियों को हर महीने 5 हजार तो अफसरों को 10 हजार रुपए का नुकसान हो रहा हैं।


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