"साड़ी" सॉरी नहीं है: कपड़ों के आधार पर रेस्टोरेंट बांट रहा महिलाओं को स्मार्ट और डंब होने का सर्टिफिकेट!

“साड़ी” सॉरी नहीं है: कपड़ों के आधार पर रेस्टोरेंट बांट रहा महिलाओं को स्मार्ट और डंब होने का सर्टिफिकेट!
- साड़ी पहनने महिला को नहीं दी गई रेस्टोरेंट में घुसने की अनुमति
- अकीला रेस्टोरेंट ने जारी किया बयान,
- सोशल मीडिया पर अटैच किए सीसीटीवी फुटेज
- कहा “महिला ने की बदसलूकी, मैनेजर को थप्पड़ भी मारा”
नई दिल्ली:- दिल्ली का बहुचर्चित रेस्टोरेंट्स Aquilla Restaurant इन दिनों चर्चा में बना हुआ है. ऐसा लग रहा है कि रेस्टोरेंट ने अब खाना खिलाने के अलावा एक और काम शुरू कर दिया गया है वह काम है महिलाओं को स्मार्ट और डंब का सर्टिफिकेट देने का.
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें अकीला रेस्टोरेंट में साड़ी पहनी महिला को प्रवेश की अनुमति नहीं दी है. वजह यह थी कि उन्होंने साड़ी पहन रखी थी. राष्ट्रों का कहना था कि उनके रेस्टोरेंट में कैजुअल स्मार्टवियर अलाउड है.
महिला ने जब पूछा कि show me that saree is not allowed जिस पर रेस्टोरेंट कर्मचारी द्वारा यह जवाब दिया गया कि we are allowed only smart casuals and saree is not comes in the smart casual. That's it..
जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर आया तो फिर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा.
इस रेस्टोरेंट के मैनेजमेंट कहना है कि साड़ी स्मार्ट कैजुअल नहीं है. ऐसे में अब भी सोच रहे होंगे कि आखिर साड़ी का स्मार्टनेस से क्या लेना-देना.
कई फैशन आए-गए लेकिन 10 हजार साल पहले भी साड़ी जैसी थी, आज भी वैसी ही है. 5-6 मीटर लंबे इस कपड़े के चादर नुमा टुकड़े को महिलाएं तबसे अपने शरीर पर लपेटती आ रही हैं, जब इंसानों ने चमड़े, पत्ते और पेड़ों की छाल से तन ढंकना शुरू किया तो भी महिलाओं के तन ढंकने का तरीका बिल्कुल साड़ी नुमा ही था. जब कपड़ा पहली बार सामने आया था तो महिलाओं और पुरुषों ने कमोबेश एक ही तरीके से इसे पहना था.
साड़ी सिर्फ पहनावा नहीं है यह क्रांति भी है
साड़ी सिर्फ पहनावा नहीं है ये क्रांति भी है. जब द्रौपदी की साड़ी खींची गई तो महाभारत हुई. रानी लक्ष्मी बाई ने साड़ी में अपने बेटे को बांधा और अंग्रेजों को काटती चली गईं. चेनम्मा ने कित्तूर की लड़ाई लड़ी और देश के साथ साड़ी की लाज भी रख ली. पद्मावती ने पति के नाम की साड़ी पहनकर जौहर कर लिया और दुर्गावती की साड़ी को दुश्मन छू भी न पाए, इसलिए वो आग में कूद गई.
साड़ी ही वो परिधान था, जिसे पहन सरला ठकराल ने प्लेन उड़ाया. साड़ी पहनीं इंदिरा गांधी आयरन लेडी कहलाईं और उन्होंने इतिहास ही नहीं भूगोल भी बदल दिया. वो तमाम महिलाएं जो साड़ी पहनकर घर और बाहर दोनों संभाल रही हैं वो हर रोज नई क्रांतियां कर कर रही हैं. ऐसे में साड़ी पहनी महिला को restaurant में एंट्री नहीं मिली.
महिला अनीता ने होटल की कर्मचारी से बहस का वीडियो शेयर भी किया है, जिसके बाद इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस पर खुद ही नोटिस लेकर दिल्ली पुलिस को चिट्ठी लिखी है। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा है कि अगर महिला के आरोप सही हैं तो रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही रेस्टोरेंट के मार्केटिंग एंड पीआर डायरेक्टर को 28 सितंबर को आयोग के सामने पेश होने के लिए भी कहा गया है.
महिला से बदसलूकी के आरोपों पर रेस्टोरेंट ने सोशल मीडिया के जरिए सफाई दी है। रेस्टोरेंट की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि हम चर्चा कर रहे थे कि महिला को कहां बैठाया जाए, इसी बीच वे अंदर आईं और हमारे स्टाफ को गाली देते हुए झगड़ने लगीं। उन्होंने हमारे मैनेजर को थप्पड़ मार दिया। हम CCTV फुटेज भी अटैच कर रहे हैं।
रेस्तरां ने दावा किया कि घटना को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था । सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद फूड डिलीवरी एप व अन्य कई लोगों ने भी रेस्तरां को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। इसके बाद बुधवार को रेस्तरां को अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए इंस्टाग्राम का सहारा लेना पड़ा। रेस्तरां का आरोप है कि चौधरी द्वारा पोस्ट की गई 10 सेकंड की क्लिप एक घंटे तक चली बातचीत का हिस्सा थी।
रेस्तरां ने लिखा है कि महिला रेस्तरां पहुंची थी। अंदर जगह न होने के कारण उन्हें कर्मचारियों द्वारा विनम्रता से गेट पर प्रतीक्षा करने का अनुरोध किया, लेकिन महिला ने रेस्तरां में प्रवेश किया और हमारे कर्मचारियों से लड़ना और गाली देना शुरू कर दिया। वहीं, महिला ने प्रबंधक को थप्पड़ मारा.
रेस्तरां ने सोशल मीडिया पर घटना के सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ एक अलग वीडियो भी जोड़ा है जिसमें साड़ी पहने महिलाएं रेस्तरां में प्रवेश कर रही हैं। रेस्तरां ने आरोप लगाया है कि चौधरी द्वारा साझा किए गए वीडियो में साड़ी के स्मार्ट कैजुअल पोशाक नहीं होने की टिप्पणी स्थिति से निपटने का एक तरीका था।
अकेला रेस्टोरेंट ने इस पूरी घटना को लेकर सोशल मीडिया पर माफी भी मांगी है। माफी मांगते हुए कहा कि अक्विला
एक घरेलू ब्रांड है और टीम का प्रत्येक सदस्य एक गौरवान्वित भारतीय के रूप में खड़ा है। गेट मैनेजर का बयान किसी भी तरह से ड्रेस कोड पर पूरी टीम के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। कंपनी की नीति में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि एथनिक परिधान में किसी को भी प्रवेश देने से मना करेंगे।
लकी महिला आयोग ने उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है आगे देखना होगा यह मामला और कितना तूल पकड़ता है.



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