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भोपाल: रिक्त शिक्षक पदों में नहीं हो रही भर्ती ! शिवराज निरंतर कर रहे शिक्षकों को दरकिनार, कहीं उखड न जाए सरकार ! !

भोपाल: रिक्त शिक्षक पदों में नहीं हो रही भर्ती ! शिवराज निरंतर कर रहे शिक्षकों को दरकिनार, कहीं उखड न जाए सरकार ! !
प्रदेश में स्थाई शिक्षकों की भारी कमी निरंतर गिर रहा शिक्षा का स्तर !!
भोपाल/राजकमल पांडे।
एक ओर जहां प्रदेश की शिक्षा का स्तर गिर रहा है, तो दूसरी ओर प्रदेश के मुखिया स्थाई शिक्षकों की भर्ती करने से आनाकानी कर रही है. मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा क्वालीफाई होने के बाद भी प्रदेश के हजारों युवाओं को आज सड़क में दरदर की ठोकरे खाने पड रहे हैं. तो कहीं भर्ती के लिए प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं. लगातार आश्वासन देने के बाद भी समय सीमा में स्थाई शिक्षकों की भर्ती न होने के सवाल पर अभ्यर्थियों ने अपने अधिकार के लिए मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल से गुहार गई है. अपितु प्रदेश के मुखिया दौरे और तबादलों में इतना व्यस्त हैं कि प्रदेश के हजारों पात्र अभ्यर्थियों की गुहार उनके कानों तलक नहीं पहुंच रही हैं. इसी बीच पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम ज्ञापन-पत्र सौंपकर अपने रोजगार प्राप्त करने व प्रदेश के शासकीय स्कूलों में समस्त रिक्त पदों पर स्थाई शिक्षकों की भर्ती की मांग की है.
अभ्यर्थियों के काउंसलिंग प्रक्रिया ने शुरू होने से आक्रोश
काउंसलिंग प्रक्रिया समय सीमा में होने से भी अभ्यर्थी बेहद आक्रोशित हैं. व बहुतों में अपने योग्यता संबंधित निर्धारित आयु सीमा को पार करते जा रहे हैं जिन वजहों से वह आर्थिक व मानसिक रूप से जूझ रहे हैं. उक्त ज्ञापन पत्र में अतिथि शिक्षकों की भर्ती में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दिलाने एवं रिक्त पदों में वृद्धि की मांग भी प्रमुख रूप से की गई है.
गौर तलब है कि जिस तरह प्रदेश के अतिथि शिक्षक एवं पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थी अपने हक के लिए दरदर की ठोकर खा रहे हैं उससे जाहिर होता है कि प्रदेश के मुखिया केवल घोषणावीर मंत्री हैं. चुनाव के पूर्व मंचों से तत्कालीन कमलनाथ सरकार पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार हमलावर थे. और अब सरकार में आते ही सब कुछ भूल कर दौरे और तबादलों में व्यस्त हो गए हैं. बडा सवाल यह है कि प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान से एक प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया संभाला नहीं जाता और अन्य राज्यों के मुद्दों का निपटारा करने के लिए हैदराबाद और दिल्ली रवाना होते हैं. वैसे प्रदेश के मुखिया होने के नाते उन्हें कहीं भी आने जाने छूट वह आ जा सकते हैं. बशर्ते जिस प्रदेश के वह मुखिया हैं उस प्रदेश का निपटारा करने में ज्यादा जोर दे तो प्रदेश सरकार की भी कमर मजबूत होगी.

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