Corona Update : क्या कम टेस्टिंग के वजह से कम हैं कोरोना वायरस संक्रमितों के आकड़े? विशेषज्ञों का कहना सरकार के पास नहीं हैं पर्याप्त टेस्टिंग लैब

Bhopal Desk ,Gautam Kumar
कोरोना वायरस ने धीरे-धीरे पुरे भारत में पाँव पसारना शुरू कर दिया है। यह आकडें तो तब हैं जब टेस्ट कम हुए हैं। जबकि विश्वभर के एक्सपर्ट्स एक बात कह चुकें हैं कि सिर्फ टेस्ट और आइसोलेशन ही अभी इसके लिए बेस्ट उपाय है। इसके अलावा आप इसे किसी भी तरीके से ठीक नहीं कर सकते हैं। लॉक डाउन के बावजूद जो संक्रमितों कि संख्या में बढ़ावा हुआ है वह इस तरफ इशारा जरूर करते हैं कि सिर्फ लॉक डाउन से ही आप इसको नहीं रोक सकते। जरूरत है तो ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करने कि ताकि जल्द से जल्द संक्रमितों कि पहचान कर इस वायरस को फैलने से रोका जा सके।
भारत में क्या है स्तिथि
भारत में विदेशी नागरिकों सहित कोरोना वायरस महामारी से संक्रमित होने वालों की संख्या शनिवार (11 अप्रैल) को बढ़कर 7447 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। मंत्रालय ने शनिवार को जारी आंकड़ों में कहा कि देश में कोविड-19 संक्रमण के चलते 239 मौतें हुई हैं और वर्तमान में कुल 6565 व्यक्ति महामारी से संक्रमित हैं। वहीं, पिछले 24 घंटे में कोरोना के 1035 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 40 लोगों को इस वायरस की वजह से अपनी जान गंवानी पड़ी है और 643 (1 माइग्रेटेड) मरीज अब तक इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं।

अब तक किन राज्यों में कितने टेस्ट हुए हैं
आईसीएमआर के मुताबिक, भारत में 8 अप्रैल तक 1 लाख 27 हजार 919 लोगों को टेस्ट किया जा चुका है। इसमें से 5114 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। बुधवार को देश के अलग-अलग टेस्टिंग लैब में 13,143 सैंपल का टेस्ट किया गया था, जिसमें से 320 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले थे। भारत में अब तक 118 टेस्टिंग लैब में कोरोना की जांच हो रही है।
Statewise Tests Done People Per Million
1. उत्तर प्रदेश – 36
2. बिहार – 40
3. मध्यप्रदेश – 53
4. हरियाणा – 63
1. राजस्थान – 234
2. महाराष्ट्र – 245
3. केरल – 335
4. दिल्ली – 547
उपरोक्त आकड़ों को देखा जाए आप साफ़ तौर पर अंदाजा लगा सकते हैं कि जिन राज्यों में ज्यादा टेस्ट्स हुए हैं उन राज्यों में संक्रमितों कि संख्या भी ज्यादा है जैसे कि दिल्ली ,केरल और महाराष्ट्र में। जिन राज्यों में टेस्ट कम हुए हैं हैं वहां संक्रमितों कि संख्या अभी भी काम दर्शाई जा रही है। इससे दो बातें साफ़ होती हैं पहली ये कि देश के पास टेस्टिंग एक़ुइप्मेन्त्स कि भारी कमी है और दूसरी राज्य सरकारें इस मामले को सीरियसली नहीं ले रही है।
टेस्टिंग के बाद एक साथ मिले थे कई संक्रमित
ताज़ा मामला बिहार के सीवान जिले का लिया जा सकता है। सिवान जिले में एक साथ दो दर्ज़न संक्रमित मरीज़ मिले हैं। अगर यही सरकार सही समय पर इस ओर ध्यान द्क्सेती और टेस्ट्स जल्द से जल्द करवा लिए जाते तो शायद इस कम्युनिटी ट्रांसमिशन को रोका जा सकता था। अब इन लोगों ने कहां -कहां जाकर किस-किस को संक्रमित किया होगा आप इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं।

विशेषज्ञों का भी मानना कम हुए हैं टेस्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस टेस्ट को लेकर भारत में अभी और गंभीरता लाने की ज़रूरत है। सवा अरब से ज़्यादा आबादी वाले देश में जिस तरह कोरोना वायरस के लिए स्क्रीनिंग और सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं वो नाकाफ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी ऐसे व्यक्ति में इस वायरस की मौजूदगी है, जो कभी न तो विदेश गया और ही ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में आया तो ख़तरा और बढ़ सकता है।
उदाहरण के तौर पर देखें तो दक्षिण कोरिया की कुल आबादी 5.1 करोड़ है। वहां 20 जनवरी से लेकर अब तक 2.5 लाख से अधिक लोगों का टेस्ट किया जा चुका है। इसके लिए टेस्टिंग सेंटर बनाए गए हैं ताकि इस महामारी से निपटा जा सके।
कितने lab होने चाहिए
वायरस के सैंपल टेस्ट करने के लिए देश भर में कुल 118 लैब बनाई गई हैं। आबादी के लिहाज़ से ये बेहद कम हैं। विशेसज्ञों के मुताबिक़, देश में क़रीब 600 या इससे अधिक सेंटर होने चाहिए जहां वायरस की टेस्टिंग कराई जा सके। सरकार के लिए यह मुद्दा हो सकता है कि एक मुद्दा यह हो सकता है कि हर व्यक्ति बुखार है उसका टेस्ट नहीं किया जा सकता लेकिन जिस किसी को भी लगातार बुखार की समस्या है और सांस लेने में परेशानी है उसका टेस्ट ज़रूर होना चाहिए।



