2 नवंबर 2026खबरें • विश्लेषण • जनसरोकार

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ब्यूरोक्रेसी मामला: आखिर क्यों दिग्विजय सिंह को दिए पत्र में उमा भारती ने लिखा आपकी सच्ची में लाडली बहन?

ब्यूरोक्रेसी मामला: आखिर क्यों दिग्विजय सिंह को दिए पत्र में उमा भारती ने लिखा आपकी सच्ची में लाडली बहन?

ब्यूरोक्रेसी मामला: आखिर क्यों दिग्विजय सिंह को दिए पत्र में उमा भारती ने लिखा आपकी सच्ची में लाडली बहन?

 

 

  •  उमा भारती के बयान पर विपक्ष हमलावर
  •  पत्राचार शुरू
  •  दिग्विजय सिंह को पत्र लिख उमा भारती ने दिया जवाब
  •  भाषा सुधारने की दे डाली नसीहत

 भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:- मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती अक्षर का रखने पुल विरोल बयानों से चर्चा में रहती हैं हाल ही में उन्होंने ब्यूरोक्रेसी को लेकर एक और बड़ा बयान दिया है.

उमा भारती (Uma Bharti) का सोमवार को वीडियो वायरल हो गया था. उसमें वो कह रही थीं कि ‘ब्यूरोक्रेसी कुछ नहीं होती. चप्पल उठाने वाली होती है ब्यूरोक्रेसी. चप्पल उठाती है हमारी. हमको समझाया जाता है कि आपका बहुत बड़ा चक्कर पड़ जाएगा ऐसा हो गया तो. क्या लगता है ब्यूरोक्रेसी नेता को घुमाती है.

 दिग्विजय सिंह ने साधा था निशाना:-

 उमा भारती के जोड़ों कृष्ण वाले बयान पर दिग्विजय सिंह ने उन्हें पत्र लिखकर निशाना साधा था जिस पर अब उमा भारती ने एक पत्र लिखकर ही पलटवार किया है.

 उनके पत्र में लिखी एक लाइन सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है.

 वह है “आपकी सच्ची में लाडली बहन”

 उमा भारती ने पत्र लिख दिग्विजय सिंह को दी नसीहत:-

दिग्विजयसिंह को भेजी चिट्ठी में उमा भारती ने लिखा है. आदरणीय दादा ब्यूरोक्रेसी पर दिए मेरे बयान पर आपने उचित प्रतिक्रिया दी है. मुझे अपनी ही बोली भाषा का गहरा आघात लगा है. मैं आपके पीछे पड़ जाती थी कि आप संयमित भाषा नहीं बोलते. यह तो बिल्कुल ऐसा हो गया जैसा रामायण में लिखा है. कर उपदेश कुशल बहुतेरे, सो अचरही ते नर न घनेरे. मैं आगे भाषा सुधार लूंगी, आप भी ऐसा कर सकें तो कर लें. उमा भारती ने खत की आखिरी लाइन में लिखा – आपकी सच्ची में लाडली बहन.

 दिग्विजय सिंह ने पत्र में कही थी यह बात:-

उमा आप मेरी छोटी बहन के नाते मुझे कम बोलने के लिए चेताती रही हैं. लेकिन आपने नौकरशाहों के ख़िलाफ़ जो अपशब्दों का उपयोग किया है वे घोर आपत्तिजनक हैं. भारतीय संविधान में ब्योरोक्रेसी नियम और क़ानून के अंतर्गत निष्पक्षता से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. वे आपके नौकर नहीं हैं. चप्पल उठाने वाले लोग नहीं हैं. आप केंद्रीय मंत्री रही हैं. मुख्यमंत्री रही हैं. इस प्रकार की टिप्पणी आपको नहीं करना चाहिए. आपको माफ़ी मांगना चाहिए.

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