सैर/सपाटा :शहर के भाग-दौड़ से दूर कुछ दिन सुकून चाहते है

सैर/सपाटा :शहर के भाग-दौड़ से दूर कुछ दिन सुकून चाहते है

विंध्याचल पर्वत शृंखला ने ओढ़ ली है हरियाली की चादर

इंदौर:अगर आप घूमने फिरने का शौकिन है और शहर के भाग-दौड़ से दूर कुछ दिन सुकून चाहते है तो चले जाइये विंध्याचल पर्वत शृंखला की सैर पे। महू-मंडलेश्वर मार्ग पर विंध्याचल पर्वत शृंखला के घने जंगल बारिश के बाद लहरा उठे हैं। ऐसा लग रहा है मानो विंध्याचल पर्वत ने हरियाली की चादर ओढ़ ली हो। इनके बीच से होकर गुजर रही सर्पाकार सड़क किसी हिल स्टेशन का मजा दे रही है।

 

 

जाम घाट स्थित जाम गेट पर रोजाना बड़ी संख्या में सैलानी पिकनिक मनाने के लिए पहुंच रहे हैं। पर्वत शृंखला की चोटी पर विराजित प्राचीन पार्वती माता मंदिर के भी दर्शन के लिए भक्त पहुंच रहे हैं। घाट पर फैली हरियाली का लुत्फ उठाकर लाेग पिकनिक मना रहे हैं।

कैसे पहुंचे जाम घाट

इंदौर से जामगेट की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है। इंदौर से महू होते हुए बड़गोंदा, मेण के रास्ते यहां तक पहुंचा जा सकता है।

जाम घाट में दर्शनीय स्थल

विंध्याचल पर्वत शृंखला ने ओढ़ी ली है हरियाली की चादरजाम गांव पर बना यह गेट मालवा का प्रवेश द्वार कहलाता है।

देवी अहिल्या बाई होलकर ने 8वीं सदी में जाम गेट चौकी बनवाई थी।

होलकरों की राजधानी महेश्वर थी और इंदौर-महेश्वर के बीच में काफिले के आराम के लिए इसे बनाया गया था।

जाम गांव में किले के साथ तालाब और बावड़ी भी बनवाई गई थी जो आज भी मौजूद है। वहीं तलहटी में प्राचीन शिव मंदिर भी बना हुआ है।

जाम गेट से नर्मदा नदी चांदी के तार के समान दिखाई देती है।