नॉनस्टिक कोटिंग के साथ मिट्टी के अनोखे बर्तन बनाते हैं गुजरात के यह शख़्स

नॉनस्टिक कोटिंग के साथ मिट्टी के अनोखे बर्तन बनाते हैं गुजरात के यह शख़्स

By: Anjali Kushwaha

ग़ुजरात: आज ज्यादातर घरों में मॉडर्न किचन के साथ खाना पकाने के लिए भी नयी-नयी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाता हैं. लेकिन मिट्टी के बर्तन मुश्किल से ही किसी किचन में देखने को मिलते हैं. कुछ घरों में लोग बस मिट्टी के बर्तनों के नाम पर पीने के पानी के घड़े का ही इस्तेमाल करते है. हालांकि मिट्टी के बर्तनों से बने खाने की बात ही कुछ और होती है. जो ना सिर्फ स्वाद, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है.

बाजार में इनकी काम मांग कम होने के कारण, कई कुम्हारों ने इन्हें बनाना भी बंद कर दिया है. लेकिन गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के सुरतान भाई ने अपनी कला को नए रूप में ढालकर रोजगार का नया अवसर खोज निकाला है.

सुरतान भाई का पूरा परिवार सालों से मिट्टी के बर्तन बनाता आ रहा है. हालांकि वह स्कूल कभी नहीं गए, लेकिन मिट्टी के बर्तन बनाने की कला में माहिर हैं. छोटा उदयपुर के वन क्षेत्र में अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहने वाले सुरतान भाई पिछड़े आदिवासी हैं. इस कला से ही उनका और परिवार का गुजारा होता था. लेकिन जैसे-जैसे मिट्टी के बर्तनों की मांग कम होने लगी, उनका काम भी कम होने लगा. जिसके बाद उन्होंने अपने पारंपरिक काम को छोड़कर मजदूरी करनी शुरू कर दी. लेकिन उन्होंने बाजार और लोगों की जरूरतों को समझकर कुछ नए प्रयोग करना शुरू कर दिया और देखा की बाजार में स्टील और एल्युमिनियम के अलावा, नॉनस्टिक बर्तन लोगों को काफी पसंद कर रहे हैं.

इसके बाद वे घर पर उपलब्ध सामानों के साथ ही अलग-अलग प्रयोग करने लगे, और आख़िरकार एक दिन इस काम में उन्हें सफलता मिल गई.

उन्होंने मिट्टी के बर्तनों को बिल्कुल प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल करके नॉनस्टिक बनाया. वह बताते हैं, “हम मिट्टी के बर्तनों को बनने के बाद, एक पूरा दिन उसे तेल में डूबा कर रखते हैं. जिसके बाद उस पर लाख की पॉलिश चढ़ाई जाती हैं. इससे बर्तन मजबूत भी बनते हैं, और नॉनस्टिक भी हो जाते हैं.” उन्होंने देखा की इसमें बने खाने में मिट्टी के बर्तन का स्वाद भी रहता है और खाना चिपकता भी नहीं है।

दोनों पति-पत्नी मिलकर मिट्टी का नॉनस्टिक तवा, कढ़ाई जैसे बर्तन बनाते. इसी दौरान एक संस्था को उनके काम का पता चला और उनकी ओर से आयोजित ‘किसान हाट’ में उन्हें अपने बनाए बर्तन बेचने का मौका मिला. फ़िलहाल, वह अपने नॉनस्टिक तवा और कढ़ाई 70 से 200 रुपये तक में बेच रहे हैं.