तालिबानियों के बीच फसे अपने की चिंता में सहमा भोपाल का यह परिवार।

- वहीद खान के पिता मोहम्मद नईम खान 1942 में अफगानिस्तान से भोपाल आकर बसे थे।
- हालही,में अपने अफगानी रिश्तेदारों को अपने घर से किए थे रवाना।
भोपाल/प्रियंक केशरवानी:– अफगानिस्तान से भारत आकर भोपाल में बसे एक ऐसे ही परिवार के सदस्य हैं एडवोकेट वहीद खान और उनकी पत्नी गुलनामा को अफदानिस्तान की हालत देख कर और आतंकवादी गतिविधियां देख कर बस एक ही चिंता सताए जा रही है कि कैसे उनके रिश्तेदार अफगानिस्तान से बचकर भारत वापस आ जाएं या वही पर कही सुरक्षित जगह पर पन्हा मिल जाए।

भारत के पड़ोसी,मैत्री मुल्क अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते कहर की वजह से हालात बिगड़ते जा रहे हैं.जो तस्वीरें सामने आ रही हैं वह बहुत ही खतरनाक है तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिरकार अफगान लोग तालिबान के कहर से बचने के लिए जान की कीमत लगाने को भी तैयार हैं.ऐसा नहीं है कि केवल अफगानिस्तान में जो लोग फंसे हुए हैं वही अपने बचने का रास्ता तलाश रहे हैं बल्कि यहां भारत में रह रहे अफगानिस्तानियों और उनके रिश्तेदारों को भी यही लग रहा है कि कैसे उनके परिजन अफगानिस्तान से सहीसलामत वापस लौट आएं.अफगानिस्तान से भारत आकर भोपाल में बसे एक ऐसे ही परिवार के सदस्य हैं एडवोकेट वहीद खान और उनकी पत्नी गुलनामा को बस एक ही चिंता सताए जा रही है कि कैसे उनके रिश्तेदार अफगानिस्तान से बचकर भारत वापस आ जाएं।
वहीद खान के पिता मोहम्मद नईम खान 1942 में अफगानिस्तान से भोपाल आकर बस गए थे,जबकि उनके बाकी रिश्तेदार वहीं अफगानिस्तान में ही रहते है.साथ ही वहीद खान के चाचा,मामा,बहन और उनके अन्य रिश्तेदार अफगानिस्तान के नूर जिले के कुनार और काबुल सहित अन्य जिलों में रह रहे हैं वहीँ वहीद खान और उनकी पत्नी ने “दी लोकनीति” से बातचीत में बताया कि उनके चाचा के लड़के-लड़कियां भी हैं,जो वही अफगानिस्तान में रहते हैं और हाल में रोज ही उनकी फोन पर बात होती रहती थी पर एक दो दिनों से फ़ोन भी नहीं लग रहा है और ना ही किसी से संपर्क हो पा रहा है।
अपने रिश्तेदारों की सलामती के लिए सरकार से लगाईं गुहार
वहीद खान और उनकी पत्नी ने “दी लोकनीत” से बातचीत के दौरान भारत सरकार से यह अपील की है अफगानिस्तान में फंसे हुए उनके परिजनों को सुरक्षित वापस लाने के लिए पहल करनी चाहिए.उनका कहना है कि तालिबान जिस तरह अफगानिस्तान में सिर उठा रहा है उससे उनके परिजनों का वहां रहना सुरक्षित नहीं है.तालिबान आतंकी विचारधारा का संगठन है जो प्रगतिशील सोच में भरोसा नहीं रखता.उनका इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है.यहां तक कि यह भी आरोप लगाया कि तालिबान को शह देने में पाकिस्तान और चीन का हाँथ है।
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