
नई दिल्ली : “महंगाई की मार” झेल रही आम जनता को एक बार फिर बड़ा झटका लग सकता है। आम जनता को ये झटका “बिजली” दे सकती है। दरअसल, भीषण गर्मी में बढ़ी बिजली की मांग पूरी करने के लिए सरकार 7.6 करोड़ टन कोयला आयात करने की तैयारी में है।
कोयला आयात करने का सीधा मतलब है कि बिजली उत्पादन अब महंगा हो जाएगा। जाहिर है कि बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियां इस बढ़ी लागत को उपभोक्ताओं से वसूलेंगी और उनके बिल पर बोझ बढ़ जाएगा। अनुमान है कि आने वाले दिनों में बिजली का प्रति यूनिट खर्च 50-80 पैसे बढ़ेगा।
बता दे कि बिजली की मांग पूरी करने के लिए कंपनियों को रोजाना 21 लाख टन कोयले की जरूरत पड़ती है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में कोयले का उत्पादन मानसून की वजह से प्रभावित होगा। लिहाजा कंपनियों को अपनी मांग पूरी करने के लिए आयात का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
वहीं, कंपनियों का कहना है कि 15 अगस्त के बाद से ही कोयले की कमी शुरू हो जाएगी लेकिन उम्मीद है कि आयात के जरिये इसकी भरपाई हो सकेगी।
मिली जानकारी के अनुसार मांग को पूरा करने के लिए सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) करीब 1.5 करोड़ टन कोयले का आयात करेगी। जबकि, अन्य सरकार और निजी बिजली उत्पादन कंपनियां भी अपनी खपत पूरी करने के लिए 3.8 करोड़ टन कोयले का आयात कर सकती हैं। इसके अलावा देश में बिजली उत्पादन की सबसे बड़ी कंपनी एनटीपीसी और दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) भी करीब 2.3 करोड़ टन कोयले के आयात की योजना बना रही है।
इस तरह साल 2022 में ही देश में करीब 7.6 करोड़ टन कोयले का आयात होगा, जो ग्लोबल मार्केट के रेट पर होना है। कहा जा रहा है कि 15 अक्टूबर के बाद स्थितियां और अनुकूल हो जाएंगी, क्योंकि तब बिजली की खपत में कमी आ जाएगी और मानसून खत्म होने के बाद कोयले का उत्पादन भी बढ़ाया जा सकेगा।