उज्जैन में हुई मौत से चेती होती सरकार तो शायद न होतीं मुरैना में इतनी मौतें, आला अफसरों पर आखिर क्यों मेहरबान शिवराज?

उज्जैन में हुई मौत से चेती होती सरकार तो शायद न होतीं मुरैना में इतनी मौतें, आला अफसरों पर आखिर क्यों मेहरबान शिवराज?

उज्जैन में हुई मौत से चेती होती सरकार तो शायद न होतीं मुरैना में इतनी मौतें, आला अफसरों पर आखिर क्यों मेहरबान शिवराज! 

 

द लोकनीति डेस्क:गरिमा श्रीवास्तव

उज्जैन के इंजन में जहरीली शराब पीने से 14  लोगों की मौत हुई थी पर इस मौत के बाद भी राज्य सरकार नहीं चेती. नतीजा यह निकला कि शराब माफियाओं का हौसला बुलंद होते गया और नतीजतन मुरैना में जहरीली शराब पीने से 14 लोगों की मौत हो गई... प्रदेश के मैदानी आला अफसरों ने भी उज्जैन घटना से सबक नहीं लिया था. अगर इस मौत को लेकर अक्सर गंभीर हो जाते तो मुरैना में 14 लोगों की जान शायद नहीं जाती.. 
 उज्जैन की घटना के बाद 14 परिवार उजड़ गए. कुछ दिन तक मामला गरमाया सियासत भी जारी रही पर फिर सरकार ने अपर मुख्य सचिव गृह डॉक्टर राजेश राजौरा की जांच रिपोर्ट को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है उस पर अभी तक अमल नहीं किया गया. 

 जहरीली शराब पीकर मुरैना के 2 गांव के अब तक 20 लोगों की मौत हो गई है.. 
 जब कोई घटना घटित हो जाती है तो फिर सरकार बड़े-बड़े वादे करती है और फिर कुछ दिन बाद सब कुछ ठंडा पड़ जाता है. विपक्ष भी सिर्फ कुछ दिन तक की सरकार पर धावा बोलती है फिर उन्हें नए मुद्दे मिल जाते हैं.. और फिर पुराने मुद्दों का दम घोंट दिया जाता है. सरकार ने यह भी दावा किया था कि अगर फिर से इस तरह की घटनाएं प्रदेश में होती हैं तो उसके लिए सीधे तौर पर कलेक्टर और अधिकारी जिम्मेदार होंगे. जांच की समिति भी बनाई गई.. 

 पहले भी अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से उज्जैन में शराब माफिया चरम पर था जिसकी वजह से 14 लोगों की जान चली गई और अब ऐसी ही घटना मुरैना में भी हो गई.
 और शायद ऐसा इसलिए हुआ कि सरकार ने समय रहते राजौरा की रिपोर्ट पर अमल नहीं किया

 राजौरा ने अपनी रिपोर्ट में यह बात साफ कही थी कि उज्जैन की घटना और मैदानी पुलिसकर्मी और आबकारी विभाग के कर्मचारियों का नतीजा है जो एक ही जगह पर 10 से 15 साल तक पदस्थ व्यवस्था को बेहतर करने के लिए उन्हें बदलना होगा एक समय पर लंबे समय तक पदस्थ होने से उनका अपराधियों और माफियाओं से गठजोड़ बन जाता है.. जैसा कि मुरैना में हुए जांच को लेकर पता चला है कि कहीं ना कहीं इस मामले में पुलिस कर्मियों की बड़ी मिलीभगत है. पुलिसकर्मी आवाज शराब भरकर ले जाने वाले वाहनों को निकलवाने का भी काम करते थे. जिस जगह पर इतनी मौतें हुई है उस जगह पर काफी लंबे समय से अवैध शराब बेची जा रही थी पर इसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहा था. 
 कार्रवाई नहीं होने की वजह से माफियाओं का हौसला बुलंद था और उन्होंने जहरीली शराब बेचना शुरू कर दिया था. अधिकारी हर बार सब कुछ ठीक-ठाक होने की रिपोर्ट भेज दिया करते थे लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही थी . 


 गोविंद सिंह ने जहरीली शराब कांड की न्यायिक जांच कराने की मांग की:- 

 कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह ने मुरैना के जहरीली शराब कांड मामले पर न्यायिक जांच कराने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध में जहरीली शराब का कारोबार राज्य सरकार के संरक्षण में चल रहा है. जिसके लिए सीधे तौर पर पुलिस और आबकारी विभाग जिम्मेदार हैं. 
 गोविंद सिंह ने यह बात भी कही की मैं तो को के आश्रितों को 20-20 लाख की आर्थिक सहायता और परिवार में किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए..

मुरैना शराब कांड में मुख्यमंत्री ने जिले के कलेक्टर और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाया, SDOP को अब निलंबित किया गया .