MP में बड़े बदलाव के संकेत! केंद्र ने 1 हफ़्ते में शिवराज-विजयवर्गीय को किया आउट, अटकलें तेज़

भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को इस बार बीजेपी संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल नहीं किया गया है, संसदीय बोर्ड ही पार्टी के महत्वपूर्ण फैसले और किसी मुद्दे पर लाइन तय करती है। लेकिन सीएम शिवराज सिंह को इस समिति से हटा दिया गया है, जिसकी चर्चा इस समय प्रदेश में ज़ोरो पर है।

सवाल है कि आखिर शिवराज सिंह चौहान को सबसे पावरफुल कमिटी से बीजेपी ने क्यों हटाया है? क्या मध्यप्रदेश में साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी चेहरा बदलने की तैयारी में है? सियासी गलियारों में इसके अलग-अलग मायने ने निकाले जा रहे हैं। इसे 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

वहीं, 2023 में बीजेपी का चेहरा कौन होगा, इस सवाल पर बीजेपी के नेता सीधे जवाब नहीं दे पाते हैं। अब केंद्र ने संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति से शिवराज सिंह को बाहर का रास्ता दिखा कर इस चर्चा को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। शिवराज के संसदीय बोर्ड से बाहर होने के बाद विरोधियों को उन्हें घेरने का मौका मिल गया है। इसके साथ ही एक निगेटिव छवि भी बनती है और दुष्प्रचार का मौका मिल जाता है। ऐसे में कयास यह भी लग रहे हैं कि क्या अभी से बीजेपी ने बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं।

बता दे कि शिवराज सिंह ही नहीं बल्कि बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी बीते दिनों पश्चिम बंगाल के प्रभारी पद से मुक्त कर दिया गया है। कैलाश विजयवर्गीय भी एमपी के कद्दावर नेता हैं। वह लगातार पश्चिम बंगाल में मेहनत कर रहे थे। विधनासभा चुनाव में हार के बाद वह पश्चिम बंगाल से दूर हैं। वह इन दिनों एमपी में ही सक्रिय हैं। वहीं, अब कैलाश विजयवर्गीय के सियासी भविष्य को लेकर भी कई अटकलें हैं। क्या 2023 के चुनाव से पहले कैलाश विजयवर्गीय को राज्य में ही पार्टी कोई बड़ी जिम्मेदारी देगी।

गौरतलब है कि एमपी में चेहरा बदलने को लेकर कई बार चर्चाएं होती रही हैं। इन चर्चाओं पर संगठन के नेता विराम भी लगाता आया है। कुछ महीने पहले भोपाल दौरे पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा आए थे। उनसे नेतृत्व परिवर्तन पर सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा कि यहां सब कुछ ठीक है। शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार अच्छा काम रही है।

लेकिन, अचानक से एक सप्ताह के अंदर एमपी के दो बड़े नेताओं को राष्ट्रीय स्तर के संगठन में जिम्मेदारी से मुक्त कर देना, इस बात के संकेत है की आने वाले चुनाव से पहले मध्यप्रदेश में कुछ बड़ा हो सकता है।

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