बैकफुट पर गई शिवराज सरकार, निकाय चुनाव के कारण नई आबकारी नीति को 3 माह के लिए टाला!

मध्यप्रदेश/भोपाल – पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने प्रदेश में शराबबंदी को लेकर अभियान शुरू करने का ऐलान किया और सीएम शिवराज सिंह चौहान को इस मुद्दे पर कई बार घेर चुकी हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने 4 फरवरी से रतलाम में नशाबंदी के खिलाफ अभियान चलाने की शुरुआत कर दी है, जानकारों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनाव से पहले उमा भारती के अभियान का असर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता हैं।
हालांकि, इसी बीच खबर है कि सरकार नई आबकारी नीति 3 माह के लिए टालने पर विचार कर रही हैं। प्रदेश में नई आबकारी नीति 1 अप्रैल की बजाय अब 1 जुलाई से लागू करने की तैयारी हैं। तब तक प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव भी संपन्न हो जाएंगे। खबरों की मानें तो नई नीति को तीन महीने के लिए होल्ड करने की एक वजह निकाय चुनाव मानी जा रही हैं।
मालूम हो कि आबकारी विभाग नई आबकारी नीति का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज चुका हैं। हर साल 15 मार्च तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, ताकि आगामी वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में शराब के ठेके 1 अप्रैल से शुरू हो सकें, लेकिन वर्ष 2020-21 के लिए प्रस्ताव तैयार होने से पहले ही नई शराब दुकानों को लेकर विवाद शुरू हो गया।
बता दें कि मध्यप्रदेश में सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 8,321 करोड़ रुपए की कमाई की थी, जबकि इस साल यानि 2020-21 में 10 हजार 318 करोड़ रुपए की कमाई की उम्मीद थी। प्रदेश में इस समय 3605 शराब की दुकानें है, जबकि 10 साल पहले 2770 दुकानें थीं।
वहीं, उमा भारती के तेवर के बाद कांग्रेस के साथ भाजपा के अंदर भी नई चर्चा छिड़ गई हैं। आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य सरकार आय बढ़ाने के लिए शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही थी, लेकिन राजनीतिक बवाल खड़ा होने के कारण उसे बैकफुट पर जाना पड़ सकता हैं।




