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शिवपुरी :- जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही आई सामने, दर्द से तड़पती रही प्रसूता, नहीं मिला स्ट्रेचर, फर्श पर दिया बच्ची को जन्म

शिवपुरी :- जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही आई सामने, दर्द से तड़पती रही प्रसूता, नहीं मिला स्ट्रेचर, फर्श पर दिया बच्ची को जन्म

 

शिवपुरी/गरिमा श्रीवास्तव:- मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था दिन-ब-दिन चौपट होती जा रही है एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभु राम चौधरी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं, तो आए दिन वहीं बिगड़ी व्यवस्था नजर आती रहती है. कभी सरकारी अस्पताल में शववाहन ना होने की वजह से पिता को अपने बेटे के शव को ठेले पर लेकर जाना पड़ता है तो वहीं अब शिवपुरी के जिला अस्पताल में प्रबंधन की लापरवाही की वजह से प्रसूता ने जमीन पर ही बच्ची को जन्म दिया.

शिवपुरी में जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई जहां एक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही लेकिन अस्पताल स्टाफ ने उसकी कोई सुध नहीं ली उसे अंदर ले जाने के लिए स्ट्रेचर भी नहीं दिया. इसके बाद दर्द से तड़प रही महिला ने अस्पताल के बाहर फर्श पर ही बच्ची को जन्म दिया. प्रसूता के परिजनों ने प्रबंधन पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि 25 मिनट तक वह मदद के लिए घूमते रहे लेकिन कोई नर्स और डॉक्टर नहीं आया.. दरअसल ग्राम रायश्री में रहने वाले दिलीप कुशवाह अपनी प्रसूता पत्नी को तेज दर्द होने की वजह से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे. प्रसूता दर्द से तड़प रही थी लेकिन उसे अंदर ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक की व्यवस्था नहीं की गई. महिला के पति दिलीप कुशवाह ने अस्पताल स्टाफ से स्ट्रेचर उपलब्ध कराने के लिए करीब 20 मिनट तक गुहार लगाई लेकिन किसी ने भी उनकी सुध नहीं ली. महिला दर्द से तड़पती रही और फिर उसने एक बच्ची को अस्पताल के बाहर फर्श पर ही जन्म दिया.

जब महिला ने बच्ची को जन्म दे दिया तो वहां भीड़ लग गई तब जाकर अस्पताल प्रबंधन की नींद खुली,जिला अस्पताल के डॉक्टर का कहना है कि अगर इस तरह की लापरवाही हुई है तो जांच कराने के बाद कार्यवाही की जाएगी.

इस तरह से मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बड़ी लापरवाही का मामला हर रोज सामने आ रहा है. गुना में एक पिता को शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया, आर्थिक स्थिति बुरी होने की वजह से पिता ने एक ठेले को किराए पर लिया और उस पर अपने बेटे का शव रखकर ले गया. उस पिता पर क्या गुजरी होगी जिसने अपना बेटा भी खोया है और इस तरह से अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की वजह से बेटे को कड़ी धूप में ठेले पर रखकर ले जाना पड़ रहा है. स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चौपट है और कोई भी सुध नहीं ले रहा है. मासूम जनता परेशान है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनावी रैलियों से फुर्सत नहीं है.

 बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था की वजह से मध्यप्रदेश में जाने कितनी मौतें हुई हैं, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है पर इस तरह किसी का भी ध्यान नहीं है. आए दिन ऐसे मामले सामने आते हैं जो मामले उजागर हो जाते हैं उस तरफ सरकार थोड़ा बहुत ध्यान देती है और जो मामले उजागर नहीं हो पाते हैं उस तरफ किसी का भी ध्यान नहीं रहता है. कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की जनता परेशान है और जनप्रतिनिधि चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त हैं. ऐसी परिस्थिति को देखकर लगता है कि आने वाले समय में इस तरह की कई और तस्वीरें सामने आ सकती हैं. क्योंकि बिगड़ती सिस्टम का अब कोई भरोसा नहीं है

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