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महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत कि खबर के बाद संत समाज स्तब्ध, CBI जांच की उठाई मांग

  • अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की मौत से संत समाज स्तब्ध 
  • महंत नरेंद्र गिरी की मौत की जगह से मिला आठ पेज का सुसाइड नोट 
  • देस के सभी संत समाज ने उठाई जांच की मांग 

भोपाल/प्रियंक केशरवानी:- अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्रगिरी की सोमवार शाम संदिग्ध हालात में मौत हो गई.खबर है कि उनका शव श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के कमरे में फंदे से लटका मिला, जिसकी जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारी वहां पहुंच गए. फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर जांच की. उनका शव पंखे में बंधे भगवा धोती के फंदे से लटका था. पुलिस को वहां आठ पेज का सुसाइड नोट मिला जिसमें आनंद गिरी समेत तीन लोगों से प्रताड़ित होने का जिक्र है, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. वहीँ अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत की खबर से उज्जैन का संत समाज भी स्तब्ध है. किसी को इस पर यकीन ही नहीं हो रहा है. संतों ने CBI जांच की मांग की है. उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए संत प्रयागराज के लिए रवाना हो गए हैं। 

संत समाज में काफी लोकप्रिय थे नरेंद्र गिरी 
2016 में उज्जैन सिंहस्थ की कमान नरेंद्र गिरि के हाथों में थी. प्रदूषित क्षिप्रा का मुद्दा हो या फिर सिंहस्थ की जमीन पर अतिक्रमण या संतों के हित की बात. उन्होंने सीएम शिवराज सिंह के सामने ये मुद्दे उठाए थे. इसलिए वो सभी अखाड़ों के सम्माननीय बन गए थे. आज उनकी एकाएक मौत की खबर के बाद अब संत समाज में रोष भी है और दुःख भी साथ ही उज्जैन अखाड़ा परिषद् के महामंत्री महंत अवधेशानंद ने नरेंद्र गिरि की मौत पर सवाल उठाये. केंद्र और राज्य सरकार से सीबीआई जांच की मांग की है. उन्होंने कहा नरेंद्र गिरि का इस तरह से जाना पीड़ा देता है. अवधेशानंद ने संतों की सुरक्षा के लिए क़ानून बनाने की मांग की है। 

संदिग्ध हालत पर उठे सवाल, संत समाज ने उठाई जांच की मांग 
उज्जैन अखाड़ा परिषद् के महामंत्री महंत अवधेशानंद ने नरेंद्र गिरि की मौत पर सवाल उठाये. केंद्र और राज्य सरकार से सीबीआई जांच की मांग की है. उन्होंने कहा नरेंद्र गिरि का इस तरह से जाना पीड़ा देता है. अवधेशानंद ने संतों की सुरक्षा के लिए क़ानून बनाने की मांग की है. आव्हान अखाड़े के महामंडलेश्वर अतुलेशानन्द ने कहा दिवंगत आत्मा को भगवान शांति प्रदान करे. उत्तर प्रदेश सरकार से विनती है कि मौत की निष्पक्ष जांच होना चाहिए. जूना अखाड़े के राष्ट्रीय सचिव मोहन भारती ने कहा वे उच्च कोटि के संत थे. उनकी मौत की खबर सुनकर काफी दुःख हुआ. हमने साथ में दो कुम्भ किये लेकिन किन परिस्थियों में उनकी मौत हुई ये जांच के बाद पता चलेगा. फिलहाल हम सब प्रयागराज के लिए निकल रहे हैं.
 

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